फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कल्याण के घर पर फिर लगा भाजपा का झंडा

Mon, 21 Jan 2013 03:16 PM IST
नई दिल्ली/लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
विज्ञापन
विज्ञापन
लंबी जद्दोजहद और कयासबाजियों के बाद आज अंततः उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पार्टी का भाजपा में विलय हो गया। सोमवार को लखनऊ में आयोजित 'अटल शंखनाद रैली' में कल्याण सिंह की जनक्रांति पार्टी (राष्ट्रवादी) भाजपा में शामिल हो गई हालांकि तकनीकी कारणों से कल्याण सांसद के रूप में भाजपा में शामिल नहीं हो पाएंगे। 
विज्ञापन


रविवार को लग गया भाजपा का झंडा
वहीं, कल्याण सिंह के घर पर रविवार को ही भाजपा का झंडा लग गया। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय कटियार शाम करीब चार बजे पूर्व मुख्यमंत्री के माल एवन्यू स्थित आवास पहुंचे। वहां उन्होंने भाजपा का झंडा लगवाया। इस मौके पर जनक्रांति पार्टी के राष्ट्रीयअध्यक्ष राजवीर सिंह और भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डा. मनोज मिश्र उपस्थित रहे।

आठ बार विधायक, दो बार मुख्यमंत्री और दो बार से सांसद कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश ही क्या देश की सियासत में जाना-पहचाना चेहरा हैं। दूर से सख्त दिखने वाले कल्याण नजदीक जाने पर सरल दिखते हैं। अलीगढ़ की अतरौली तहसील के मढ़ौली गांव में छोटे से किसान परिवार में पैदा होने वाले कल्याण का प्रारंभिक जीवन बहुत संघर्षों भरा रहा।
विज्ञापन


खेत जोतने से लेकर खेती से जुड़े हर काम किया। कक्षा 7 से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता रहे कल्याण ने अलीगढ़ के गांव-गांव साइकिल से जाकर शाखाएं लगवाई। जो आज भी चल रही हैं। आज भी सुबह की चाय वह खुद बनाते हैं। सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि जितने भी लोग मौजूद होते हैं उन सबके लिए।

अच्छे राजनेता के रूप में पहचाने जाने वाले कल्याण बेहतर खानसामा भी हैं। वह, फिल्मों, कविताओं पुराने गानों और बचपन में स्वांग देखने के भी काफी शौकीन रहे हैं। भाजपा में वापसी की पूर्व संध्या पर ‘अमर उजाला’ ने कल्याण से बात करके उनके जीवन के तमाम अनछुए पहलुओं को जानने की कोशिश की। प्रस्तुत हैं उनके अंश

आप इतने प्रखर वक्ता कैसे बने?
मैं संघ से जनसंघ में भेजा जा चुका था। 1962 में मुझे अतरौली (अलीगढ़) से चुनाव लड़ने का निर्देश मिला। अध्यापक पद से त्यागपत्र देकर नेता हो गया। अब समस्या आई भाषण देने की। रात-रात भर लालटेन की रोशनी में भाषण तैयार करता। फिर उसके प्वाइंट छांटता। कमरा बंद करके अकेले भाषण देने का अभ्यास करता। लोग समझते हैं कि मैं बहुत अच्छा वक्ता हूं लेकिन मैं यह कैसे बताऊं कि हर भाषण या बैठक के पहले मैं अपने प्वाइंट तैयार करता हूं। सच तो यह है कि मैंने आज तक बिना तैयारी किए कभी माइक नहीं पकड़ा।

आप गरमी में भी गरम पानी से नहाते हैं?
बिल्कुल सही है। बारहों महीने मैं गरम नहीं बल्कि चहकते (लगभग खौलते) हुए पानी से नहाता हूं और दिसंबर की कड़ाके की ठंड में भी फ्रिज की काफी ठंडा पानी पीता हूं। यह सब मेरे पिताजी स्व. तेजपाल सिंह और माता स्व. सीता देवी की सीख का असर है। दोनों लोग कहते थे कि आदमी को विपरीत परिस्थितियों से टकराने का अभ्यास करना चाहिए।

खाने में क्या पसंद है?
पूरी तरह शाकाहारी हूं। पहले की बात करें तो मेरी चाची (मँ) ने सिर्फ पानी या रायता छोड़ दें तो कोई ऐसी खाने वाली चीज नहीं थी जिसमें घी न खिलाया हो। पर, अब तो घी खाने पर प्रतिबंध ही है। पहले दूध भी खूब पीता था। डॉक्टरों ने इसे भी रोक दिया।   

तो आप खाना भी बना लेते हैं?
बना ही नहीं लेता बल्कि बहुत अच्छा बना लेता हूं। मुख्यमंत्री हुआ तो भी यह आदत बनी रही। कार्यालय से निकलने के पहले घर पर फोन करके कह देता था कि सब्जी कटवा लो। आकर बनाऊंगा मैं। घर आता था। सब्जी छौंक दिया। जब तक सब्जी बनी तब तक फाइलें निपटा डालीं। फिर किसी ने रोटी बना दी और खा लिया। सच मानिए मेरे हाथ की सब्जी कोई खा ले और दाल बना दूं, वह भी काले उड़द की तो अंगुलियां चाटते रहे जाएंगे।

कौन सी पुस्तकें और खेल पसंद हैं?
खेलों में तो कुश्ती और कबड्डी ही खेला और वही आज भी पसंद है। पुस्तकों में स्वामी विवेकानंद, दयानंद सरस्वती, सत्यार्थ प्रकाश, गुरुजी समग्र, वाल्मीकि, तुलसीदास, सूरदास, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, महात्मा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी की पुस्तकों को पढ़ा।

फिल्मों को लेकर कोई रुचि?
पहले खूब देखता था। आज भी मुझे उपकार फिल्म का यह गाना ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’ खूब याद है। झनक-झनक पायल फिल्म भी खूब देखी। मदर इंडिया फिल्म ने भी खूब प्रभावित किया।  पर, अभिनेताओं या अभिनेत्रियों में पसंद या नापसंद इसलिए नहीं बताऊंगा कि बाकी लोग नाराज हो जाएंगे। सभी अच्छे हैं।

नूतन, मीना कुमारी, वहीदा रहमान, नरगिस, मुमताज, रेखा, हेमामालिनी, दिलीप कुमार, बलराज साहनी, प्रदीप कुमार, अशोक कुमार, राजेश खन्ना, मनोज कुमार सहित कई ऐसे कलाकर हुए जिन्होंने अपने अभिनय से काफी प्रभावित किया। नाटकों में हरिश्चंद्र ने काफी प्रभावित किया। मोरध्वज नाटक भी खूब देखा। स्वांग मंडलियों का आकर्षण तो आज भी है।

जिद मेरा जीवन है
इस सवाल पर कि लोग आपको जिद्दी नेता कहते हैं? कल्याण कहते हैं कि उन्हें बचपन से अडिग रहने की शिक्षा मिली। लोग इसे जिद नाम देते हैं। पर, यही दृढ़संकल्प मेरा जीवन है। मेरी कविता की यह पंक्तियां प्रमाण हैं।
विज्ञापन

झुकना नहीं स्वीकार, टूटने की परवाह नहीं है।
बीच राह में छोड़े उस साथी की चाह नहीं है।।

कल्याण सिंह
जन्म - 05 जनवरी
दो बार मुख्यमंत्री
आठ बार विधायक
दो बार सांसद
शिक्षा -बीए-एलटी
पुत्र -राजवीर सिंह
पुत्री -प्रभा
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें