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पति पीयूष ने ऐसे करवाया ज्योति का मर्डर

Thu, 31 Jul 2014 09:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
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अवैध संबंध में बाधक बनने पर ज्योति की हत्या उसके पति पीयूष श्याम दासानी ने ही कराई थी। पीयूष ने अपने पूर्व ड्राइवर अवधेश और उसके दो साथियों को 50 हजार रुपये की सुपारी दी थी। 30 हजार भुगतान कर दिए गए थे बाकी रकम बाद में देनी थी। आईजी जोन आशुतोष पांडेय ने हत्याकांड के खुलासे की जानकारी देते हुए बताया कि वारदात वाले दिन पहले से तय साजिश के अनुसार रेस्टोरेंट से लौटते समय रास्ते में हत्यारोपी मिले थे।
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पीयूष ने कार रोककर ज्योति को कार समेत हत्यारोपियों के हवाले कर दिया और खुद उतर गया। तीन हत्यारोपियों में से एक कार चलाता रहा और बाकी दो ने ज्योति को चाकुओं से गोद डाला। पुलिस ने अवधेश और उसके साथियों सोनू और रेनू को पकड़ लिया है। सबके खिलाफ हत्या समेत कई धाराएं लगाई गई हैं।

दोपहर में पीयूष को जेल भेज दिया गया। वारदात की पूरी जानकारी रखने और सहयोग देने के आरोप में पुलिस ने पीयूष की प्रेमिका एक पान मसाला कारोबारी की बेटी को भी षडयंत्र का आरोपी बनाया है।
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27 जुलाई की रात हुई थी हत्या

काकादेव पांडु नगर निवासी उद्यमी पीयूष श्याम दासानी की पत्नी ज्योति (27) की 27 जुलाई की रात हत्या कर दी गई थी। ज्योति अपने पति पीयूष के साथ नवाबगंज रैना मार्केट के वरांडा रेस्टोरेंट से खाना खाकर कार से लौट रही थी।

रास्ते में चंद्रशेखर आजाद कृषि एंव प्रौद्योगिक विवि. (सीएसए) के पास अज्ञात बाइक सवारों ने ज्योति को कार समेत अगवा कर मार डाला था। बाद में ज्योति की लाश कार में ही पनकी इलाके में मिली थी। पुलिस ने पहले दिन से ही पीयूष को शक के घेरे में रखा था।

मंगलवार को उसे हिरासत में लेने के बाद रात में सर्विलांस, मोबाइल कॉल की सीडीआर, सीसीटीवी फुटेज और प्रेमिकाओं से आमना-सामना कराया गया तो पीयूष टूट गया। आईजी ने बुधवार को अपने दफ्तर परिसर में प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि वारदात वाले दिन रेस्टोरेंट में आने से पहले ही पीयूष ने ज्योति की हत्या का पूरा ताना-बाना बुन लिया था।

अपने ही बनाए 'खूनी जाल' में फंस गया पीयूष

पीयूष खाना खिलाने के बहाने ज्योति को वरांडा रेस्टोरेंट ले गया था। फोन करके वहीं अवधेश और उसके दोस्तों को बुलाया। बहाने से नीचे आकर दोनों से मिला। इस दौरान पीयूष ने सीसीटीवी कैमरे का पूरा ध्यान रखा। कवरेज एरिया से दूर तीनों को खड़ा कर रखा था। दोबारा रेस्टोरेंट में वापस गया। फुटेज में पीयूष की बेचैनी साफ दिखी। वहीं रेस्टोरेंट से पीयूष ने अपनी प्रेमिका से भी बात की।

रात 11:30 बजे इलाहाबाद की ओर लॉंग ड्राइव पर चलने की बात कहकर पीयूष और ज्योति कार में सवार हुए। सीएसए-रावतपुर मार्ग पर रामचरन की मड़ैया निवासी ड्राइवर अवधेश, सोनू और अवधेश का दोस्त ड्राइवर रेनू कनौजिया मिल गए। पीयूष कार से नीचे उतर गया। तीनों कार में घुस गए। ज्योति ने कहा भी कि पीयूष ये क्या करा रहे हो तो पीयूष बोला- अब जाओ काम खत्म।

फिर तीनों ज्योति को लेकर कार समेत चल निकले। अवधेश कार चलाता रहा और दलहन अनुसंधान वाली रोड पर रेनू कनौजिया और सोनू ने चाकू से ताबड़तोड़ वार कर ज्योति को मार डाला। तीनों कार को पहले से तय सुरक्षित जगह पनकी ले गए। वहां छोड़कर आराम से भाग निकले। आईजी ने बताया कि वारदात के बाद पीयूष ने अपना ब्लैकबेरी मोबाइल अपनी प्रेमिका एक पान मसाला कारोबारी की बेटी को दिया और कहा कि अपना और इसका दोनों का सिम तोड़ डालो, काम हो गया है। इससे यह तय है कि कारोबारी की बेटी को पूरी जानकारी थी, सिम तोड़कर उसने वारदात में सहयोग किया। इससे उसके खिलाफ साजिश में शामिल होने की धारा में कार्रवाई की जा रही है।

जेल पहुंचते ही दहाड़ मारकर रोया पीयूष

पत्नी ज्योति की हत्या का अभियुक्त पीयूष श्याम दासानी जेल पहुंचते ही दहाड़ मार कर रो पड़ा। जेल में उसे मुलाहिजा बैरक में रखा गया है। इससे पहले बुधवार शाम पुलिस ने उसे कड़ी सुरक्षा में चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) सत्यदेव गुप्ता की कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। कोर्ट से जेल ले जाते समय वकीलों ने हो-हल्ला किया तो पुलिस ने उसे छिपा दिया। कोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी है।

शाम करीब चार बजे स्वरूप नगर पुलिस ने पीयूष को सीएमएम कोर्ट में पेश किया तो उसे देखने के लिए काफी भीड़ जमा थी। अदालत ने इस पर नाराजगी जताई तो पुलिस ने लोगों को बाहर करना शुरू कर दिया। कोर्ट ने पीयूष को जेल भेजने का आदेश दिया। इसी दौरान अधिवक्ता जयंत कुमार जायसवाल और सौरभ जैन ने पीयूष की जमानत अर्जी कोर्ट के सामने पेश की। अदालत ने इस अर्जी को खारिज कर दिया।

पुलिस पीयूष को लेकर कोर्ट से निकली तो बाहर जमा वकीलों ने हो-हल्ला शुरू कर दिया। पुलिस ने स्थिति भांप पीयूष को पीछे खींच लिया और अदालत के बगल में सुरक्षा घेरा बनाते हुए छिपा लिया। बाद में उसे सुरक्षा घेरे में ही कचहरी से बाहर निकाला गया। जेल अधीक्षक पीडी सलोनिया ने बताया कि पीयूष का मेडिकल कराया गया है। जेल में पहुंचते ही वह जोर-जोर से रोने लगा। अब उसकी काउंसलिंग कराई जाएगी।

आरोपी अवधेश ने बयां की हत्या की पूरी कहानी

ज्योति की हत्या की साजिश 2 जुलाई को रची गई थी। 20 जुलाई को उसे गंगा बैराज पर मौत के घाट उतारने की तैयारी थी। 20 को पीयूष ज्योति को लेकर बैराज पहुंचा भी लेकिन अचानक बरसात होने के कारण अवधेश और उसके साथी बैराज नहीं पहुंच सके और हत्या टल गई। इसके बाद 27 जुलाई को ज्योति की हत्या करना तय हुआ और उस दिन अवधेश ने साथियों के साथ सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दे दिया।

पांडु नगर कच्ची बस्ती निवासी अवधेश ने ज्योति हत्याकांड का पूरी कहानी मीडिया के सामने सिलसिलेवार बयां की। अवधेश ने बताया कि पहले ज्योति की हत्या के लिए 20 जुलाई की तारीख मुकर्रर थी। तय हुआ था कि पीयूष ज्योति को लेकर गंगा बैराज पहुंचेगा। पीछे से वह भी रेनू और सोनू के साथ वहां पहुंच जाएगा।

बैराज पर ही सुनियोजित तरीके से ज्योति को मौत के घाट उतार दिया जाएगा। पर उस दिन बरसात हो गई और वे लोग नहीं पहुंच सके।

ज्योति की क्रूरता से की गई हत्या

अवधेश ने बताया कि 27 जुलाई को पीयूष का फिर फोन आया। शाम साढ़े छह बजे फिर बातचीत हुई। पीयूष ने कहा कि रात में वह ज्योति को लेकर रैना मार्केंट स्थित वारंडा रेस्टोरेंट जाएगा। रास्ते में मिल जाना। इसके बाद वारांडा रेस्टोरेंज के बाहर मिलने की बात भी तय हुई। अवधेश के मुताबिक वह, रेनू और सोनू तय समय पर 27 जुलाई की देर शाम पैदल ही सीएसए चौराहा के पास पहुंच गए। वहां पीयूष कार लेकर पहले से ही खड़ा था। उसने इशारे से अपनी कार पहचनवा दी। इसके बाद उसकी और पीयूष की वारांडा रेस्टोरेंट के पास भी मुलाकात हुई।

बातचीत के बाद वह साथियों के साथ सीएसए से रावतपुर जाने वाली रोड पर पहुंच गया। रेस्टोरेंट से निकलकर पीयूष ज्योति को लेकर इसी रोड पर पहुंचा। बकौल अवधेश हम लोग पहले से ही वहां खड़े थे। हमको देखकर पीयूष ने अपनी कार रोक दी और ड्राइविंग सीट से उतर गया। अवधेश ने बताया कि उसने पीयूष की कार की स्टेयरिंग संभाल ली। कार की पिछली सीट पर रेनू और सोनू बैठ गए। उसने कार रावतपुर रोड पर दौड़ा दी। इस दौरान रेनू और सोनू ने ज्योति को अगली सीट से पिछली सीट पर घसीट लिया। ज्योति के शोर मचाने पर उन लोगों ने उसका मुंह दबा लिया।

रेनू ने ज्योति का सिर झुकाकर पिछली सीट के नीचे घुसेड़कर उसे असहाय कर दिया और सोनू ने चाकू से ताबड़तोड़ प्रहार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस दौरान वह कार जीटी रोड पर दौड़ाता रहा। फिर कल्याणपुर क्रासिंग से पनकी रोड पर कार मोड़ दी। पनकी थाने के पास एक गली में सूनसान जगह पर कार खड़ी की। कार लॉक करने के बाद चाभी वहीं पर फेंक दी। वारदात में प्रयुक्त चाकू भी वहीं फेंक कर वे लोग पैदल भाटिया तिराहे तक आए और फिर फरार हो गए।

प्रेम प्रसंग की पूरी जानकारी थी अवधेश को

अवधेश ने बताया कि वह पांडु नगर में पीयूष के घर के बगल में रहने वाले पान मसाला कारोबारी हरीश माखीजा की बेटी मनीषा का ड्राइवर था। अक्सर पीयूष की गाड़ी भी चला लेता था। उसे मनीषा और पीयूष के प्रेम संबंधों की जानकारी थी। दोनों में करीब ढाई साल से संबंध थे।

मनीषा और पीयूष जब भी मिलते थे, वह मनीषा के साथ रहता था। जब पीयूष और मनीषा कार में बैठ जाते थे, तब वह कार से उतर कर दूर जाकर खड़ा हो जाता था। अवधेश के मुताबिक करीब डेढ़ साल पहले उसने मनीषा के घर काम छोड़ दिया था पर पीयूष के लगातार संपर्क में बना रहा। बकौल अवधेश 2 जुलाई को पीयूष ने उसे मोबाइल पर फोन करके मिलने को कहा। वह पीयूष से मिला तो पीयूष ने उससे ज्योति को मार डालने की बात कही।

पीयूष ने अपने और मनीषा के संबंधों की दुहाई भी दी थी। ज्योति की हत्या की सुपारी 50 हजार रुपये में तय हुई। इस बातचीत के चार दिन बाद पीयूष ने उसे 30 हजार रुपये दिए थे। इसके बाद उसने अपने दोस्त रेनू कनौजिया को हत्या की साजिश के बारे में बताया। रेनू भी पैसों के लालच में वारदात के लिए राजी हो गया। उसने अपने एक दोस्त सोनू को भी तैयार कर लिया। उसने रेनू को 20 हजार रुपये एडवांस के रूप में दिए थे। जबकि 10 हजार रुपये खुद रखे थे।

पीयूष और मनीषा की शादी में बाधा बनी कुंडली

पान मसाला कारोबारी की बेटी मनीषा के लिए पीयूष ने अपनी नवेली दुल्हन ज्योति की हत्या करा दी। आईजी आशुतोष पांडेय ने बताया कि दोनों एक-दूसरे को प्यार करते थे। शादी भी करना चाहते थे लेकिन कुंडली नहीं मिलने से शादी नहीं हुई। इधर, पीयूष अपनी शादी के बाद भी मानसिक और शारीरिक रूप से मनीषा से जुड़ा रहा। ज्योति को इसकी जानकारी हो गई थी। मनीषा को पाने के लिए ही इसने ज्योति को रास्ते से हटाया।

रक्षाबंधन से पहले करनी थी हत्या:
पीयूष ने ज्योति को रास्ते से हटाने की रणनीति बड़ी ही जल्दबाजी में बनाई। यह किसी भी सूरत में रक्षाबंधन से पहले ज्योति को मार डालना चाहता था। ज्योति को पीयूष के कई महिलाओं से अंतरंग संबंध की जानकारी हो गई थी। शुरू में तो उसने बर्दाश्त किया। पर, बाद में जब मोबाइल छूते ही पीयूष डांट-डपट करने लगता, मैसेज डिलीट कर देता तो ज्योति का शक पक्का हो गया। ज्योति ने पहली कंपलेन अहमदाबाद में रहने वाली अपनी एक रिलेटिव से की। मां कंचन नागदेव को 15 दिन से रात एक बजे से चार बजे तक बाहर रहने की बात बताई।

पीयूष फैक्ट्री में काम बहाना बनाकर कहीं और समय गुजारता था। रक्षाबंधन में ज्योति को जबलपुर जाना था। पीयूष को लगने लगा कि यदि जबलपुर में इसने पूरी बात बता दी तो बदनामी हो जाएगी। उत्पीड़न का मुकदमा भी लग सकता है। इसी वजह से पीयूष हर हाल में ज्योति को रक्षाबंधन से पहले निपटा देना चाहता था।

फैक्ट्री कर्मी युवती को करता था ब्लैकमेल

पुलिस की जांच में यह भी खुला कि पीयूष अपनी फैक्ट्री में कार्यरत एक युवती पर फिदा था। वह उसे इमोशनल ब्लैकमेल करता था। पीयूष ने इसे भी शादी का झांसा दे रखा था। पहले पुलिस ने इसे भी वारदात में सहयोगी की संभावना पर उठाया, घंटों पूछताछ की।

पर, यह खुद शोषण का शिकार थी, इस वजह से पुलिस ने इसे क्लीन चिट दे दी। युवती ने बताया कि 27 को पीयूष ने उसके पास छह घंटे के भीतर 150 मैसेज किए थे। मैसेज में प्यार, शादी कर लेने का वादा और भी कई तरह की बातें थीं। दोनों में सोमवार साथ बिताने का करार भी हुआ था।

मनीषा को दे रखे थे पांच सिम:
पीयूष ने प्रेमिका मनीषा को पांच सिम दे रखे थे। दो सिम उसने फर्जी नाम-पते से लिए थे। इसमें एक सिम खुद और दूसरा मनीषा प्रयोग कर रही थी। दोनों सिम बांदा जिले के फर्जी नाम-पते से लिए गए थे।

आईजी ने बताया कि पीयूष ने यह स्वीकार भी किया। बताया कि फैक्ट्री के एक लेबर के भाई की दादा नगर में मोबाइल की दुकान है। यह दोनों सिम वहीं से दो महीने पहले लिए थे। पीयूष ने दो माह के दौरान इस सिम से 1200 कॉल किए। इसमें 663 कॉल मनीषा को और 330 कॉल फैक्ट्री कर्मी युवती को किए थे। पुलिस फर्जी नाम-पते से सिम देने वाले दुकानदार भी जांच शुरू करा दी है।

हाईप्रोफाइल मामला होने से हुआ अच्छा सलूक

हत्या के मामले में आरोपी आम व्यक्ति होता तो पुलिस का उससे व्यवहार जग जाहिर है। यहां मामला हाईप्रोफाइल और आरोपी भी बड़े घरानों से जुड़े थे। इस वजह से पुलिस ने मुख्य साजिश कर्ता पीयूष श्याम दासानी और उसकी प्रेमिका मनीषा माखीजा के संग पूछताछ में खास सलूक भी किया। इन दोनों को हवालात में नहीं डाला गया। बल्कि थाने से पुलिस लाइन तक सम्मान से कुर्सी पर बिठाया गया। पूछताछ में भी सख्ती नहीं की गई।

थाने से पुलिस लाइन तक राजनैतिक और व्यापारिक दलों के नेता एवं परिजन डेरा डाले रहे। इनके आरोपियों से मुलाकात करने पर भी कोई रोक-टोक नहीं रही। पीयूष और मनीषा को इधर से उधर ले जाने में लग्जरी कार का इस्तेमाल किया गया। इसकी वजह थी पीयूष और मनीषा के घरवालों का आर्थिक और सामाजिक दोनों तरीके से मजबूत होना। वरना आरोपी आम व्यक्ति होता तो पुलिस क्या हश्र करती यह किसी से छिपा नहीं है।

ज्योति हत्याकांड के आरोपी पीयूष को पुलिस ने जब हिरासत में लिया तो उसे सलीके से उसे घर के बाहर लाया गया। फिर पुलिस जिप्सी से उसे सीओ स्वरूप नगर दफ्तर लाया गया। यहां पूछताछ भी ऐसे हुई जैसे हॉट सीट पर बिठाकर सवाल-जवाब होते हैं। पीयूष एक कुर्सी पर बैठा था और चारों तरफ पुलिस और क्राइम ब्रांच के अफसर। अफसर एक-एक कर उससे सवाल संभल-संभल कर रहे थे। पीयूष ज्यादातर सवालों का जवाब न में देता रहा। पर, पुलिस ने उसे टच नहीं किया। सब कुछ प्यार से पूछा।

मनीषा के साथ भी अदब के साथ पेश आई पुलिस

इसके बाद उसे वारंडा रेस्टोरेंट और कार शोरूम के सीसीटीवी फुटेज दिखाए। बुधवार को आईजी दफ्तर भी पीयूष को लग्जरी कार से ले जाया गया। फिर वहां से कोर्ट और जेल तक पीयूष लग्जरी कार से गया। इस दौरान उसके परिजन, व्यापारिक और राजनैतिक क्षेत्र से जुड़े लोग सीओ दफ्तर से जेल गेट तक तक साथ-साथ रहे। ताकि उसे किसी तरह की परेशानी न हो। पीयूष के परिवार और उससे जुड़े लोगों से भी पूछताछ में पुलिस ने सहजता दिखाई।

इसी तरह मनीषा को भी काफी अदब के साथ घर से सीओ दफ्तर, महिला थाने के बाद पुलिस लाइन ले जाया गया। मनीषा लग्जरी कार में ऐसे बैठी थी जैसे वह आरोपी न हो। पुलिस लाइन में भी आर्डली रूम में उसे कुर्सी पर बिठाया गया। यहां विधायक अजय कपूर समेत कई राजनैतिक दलों के लोग, व्यापारी नेता, कारोबारी और परिवार के लोग मनीषा से मुलाकात करने पहुंचे। तमाम लोग दिन और रात में मनीषा के आसपास मंडराते रहे। रात करीब 11 बजे मनीषा को पुलिस लाइन से महिला थाने ले जाया गया। गुरुवार को अवधेश, रेनू, सोनू, आशीष और मनीषा को कोर्ट में पेश किया जाएगा।

ज्योति हत्याकांड के इन आरोपियों से इस तरह का सलूक किया गया। वहीं अगर आरोपी आम होता तो पुलिस घर में घुसकर परिवार वालों से बदसलूकी करती। गृहस्थी का सामान उलट-पलट देती। आरोपी को सड़क पर पिटती। पैदल या आटो से थाने तक लेकर आती। फिर हवालात में डाल देती। पूछताछ के दौरान कुर्सी नहीं जमीन पर बिठाती। सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता तो बार-बार पिटती। पर, मामला हाईप्रोफाइल था, सो आरोपियों से व्यवहार भी उसी तरीके से किया गया।

लखनऊ में डेरा डाले रहे कई कारोबारी

पीयूष और मनीषा को बचाने के लिए शहर के कई कारोबारी और राजनैतिक दलों के लोग लखनऊ में डेरा डाले रहे। चर्चा है कि ये लोग दोनों के खिलाफ हल्की धाराओं में कार्रवाई कराने या जांच किसी दूसरी एजेंसी से कराने की कोशिश में जुटे रहे। पर, मामला हाईलाइट होने की वजह से उनके इरादे पूरी नहीं हो सकी।

मनीषा से मनोवैज्ञानिक तरीके से हुई पूछताछ
पुलिस की मानें तो आरोपी मनीषा माखीजा ने अपने और पीयूष के रिश्तों से इनकार किया। उसने दो टूक शब्दों में कहा कि ज्योति हत्याकांड के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है। मनीषा ने कहा कि वह करीब तीन साल पहले ही पढ़ाई करके दिल्ली से लौटी है। मनीषा के किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब न देने पर पुलिस ने पूछताछ में मनोवैज्ञानिक तरीका अपनाया। अफसरों ने उससे कहा कि तुम्हारे मोबाइल की कॉल डिटेल और मैसेज का पूरा ब्योरा उनके पास है। यह तक मालूम है कि तुम्हारी किससे कब और क्या बात हुई है। मैसेज से क्या बात हुई है। पुलिस के यह कहते ही मनीषा डर गई। उसने अपने और पीयूष के रिश्तों के बारे में सच बता दिया। यह भी कहा कि वारदात के बारे में उसे पहले से जानकारी थी।

पहले छोड़ दिए थे तीन आरोपी
ज्योति को मौत के घाट उतारने के बाद सभी हत्यारोपी अपने घर लौट आए थे। तफ्तीश के दौरान सुराग मिले तो पुलिस ने आरोपी रेनू कनौजिया, सोनू और आशीष को हिरासत में लिया। पीयूष का इन लोगों से आमना-सामना कराया। पीयूष ने तीनों को पहचानने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने तीनों को परिजनों को सौंप दिया। पर, तीनों पर निगाह रखे रही। सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद पीयूष ने सच उगला। इसके बाद अवधेश और फिर रेनू, सोनू और आशीष दुबारा पकड़ा गया।

रासुका लगाने की तैयारी
ज्योति हत्याकांड के सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर और रासुका लगाने की तैयारी चल रही है। आईजी का कहना है कि जिस तरीकेसे ज्योति की हत्या हुई है। आरोपियों पर गैंगस्टर के साथ रासुका की कार्रवाई होगी।
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नहीं था किसी तरह का दबाव

आईजी ने बताया कि ज्योति हत्याकांड में किसी को बचाने के लिए राजनैतिक दबाव नहीं था। लोग अपनी लापरवाही छिपाने के लिए राजनैतिक या अन्य किसी तरह के दबाव होने का बात कहते हैं।

पीयूष और मनीषा को बचाने की कोशिश भी हुई
हत्यारोपी पीयूष और मनीषा को बचाने की भी पुलिस ने कोशिश की। यह बताया गया कि ज्योति की हत्या के समय पीयूष कार में मौजूद था। केवल वह साजिश रचने का आरोपी है। इसी तरह मनीषा के लिए कहा गया कि उसे ज्योति की हत्या के बारे में कुछ मालूम नहीं था। पर, मोबाइल कॉल डिटेल में मनीषा से बातचीत होने की चर्चा हुई तो पुलिस अफसरों ने कहा कि मनीषा ज्योति की हत्या की साजिश में शामिल है।

गुडवर्क करने वाली टीम को मिला इनाम
ज्योति हत्याकांड का पर्दाफाश करने वाली पुलिस टीम को आईजी ने 15 हजार रुपये का इनाम दिया है। साथ ही 25 हजार रुपये इनाम के लिए डीजीपी को संस्तुति करने की बात भी कही है। आईजी ने कहा है कि तफ्तीश में शामिल रहे डीआईजी आरके चतुर्वेदी, एसएसपी के. सुनील इमैनुएल और एसपी पूर्वी प्रभाकर चौधरी को प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।
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