महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े कानूनों को सख्त बनाने को लेकर गठित जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी है। बुधवार को सौंपी गई यह रिपोर्ट 200 पन्नों की है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के लिए देश-विदेश से करीब 80 हजार सुझाव मिले हैं। उन्होंने कहा कि सभी सुझावों का स्वागत किया गया है।
रिपोर्ट सौंपने के बाद जस्टिस वर्मा ने कहा कि समाज के सभी वर्ग के लोगों ने सुझाव भेजे हैं। सभी सुझावों पर विचार किया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं ने हमें रास्ता दिखाया और बताया कि सरकार कैसे चलाई जाती है। वर्मा ने दिल्ली गैंगरेप के बाद आंदोलन के लिए युवाओं की सराहना की है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट तैयार करने में 29 दिनों का समय लगा।
जस्टिस वर्मा ने कहा, 'मुझे यह देखकर बहुत आश्चर्च हुआ कि दिल्ली गैंगरेप के मामले में कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह सचिव ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर की पीठ थपथपाई।' उन्होंने कहा है कि अगर वह गृह सचिव होते तो पुलिस कमिश्नर से माफी मांगने के लिए कहते। जस्टिस वर्मा ने अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद मीडिया से कहा कि सुशासन की कमी के कारण रेप की घटनाएं होती हैं।
जस्टिस वर्मा ने कहा कि इस रिपोर्ट में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी तक से सुझाव मिले है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट बनाते समय सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी बात की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार की नाकामी महिलाओं की असुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। जस्टिस वर्मा ने कहा कि संसद के अगले सत्र में रिपोर्ट की सिफारिशों पर विचार किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद देश भर में लोगों ने सख्त कानून की मांग को लेकर आंदोलन किया था। आंदोलनकारियों ने महिलाओं के साथ अपराध पर सख्त कानून बनाने की मांग की थी। केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों की मांग को देखते हुए जस्टिस वर्मा कमेटी का गठन करके बलात्कार और यौन शोषण से जुड़े मामलों में सख्त कानून बनाने के लिए सुझाव मांगे थे।