बिहार के पश्चिम चंपारण जिले का दोन इलाका बाल्मीकि टाइगर रिजर्व का हिस्सा है। थारू आदिवासी बहुल इस इलाके की दो पंचायतों के तहत 25 गांव आते हैं। ये गांव यूँ तो दूसरे गांवों की ही तरह हैं, लेकिन जो चीज आकर्षित करती है वो है घरों में लगे ऊँचे एंटीने। ये गांव हिमालय की शिवालिक पर्वत शृंखला के सोमेश्वर पहाड़ों के बीच बसे हैं। इन गांवों में बांस पर एक तय ऊंचाई पर लगे एंटीना के जरिए ही मोबाइल नेटवर्क मिलता है।
एंटीना काम कैसे करता है? इस बारे में बेथानी दोन के रोहित महतो बताते हैं, ‘‘एंटीना से लगे तार का एक सिरा घर के अंदर रहता है। मोबाइल को तार के इस सिरे से लपेट कर रखने पर कामचलाऊ नेटवर्क मिल जाता है।’’ इस जुगाड़ तकनीक के कारण इलाके में मोबाइल भी लैंडलाइन की तरह ही इस्तेमाल हो रहा है। गोबरहिया दोन के रामविनय काजी यह परेशानी कुछ इस तरह बयान करते हैं, ‘‘एंटीना पर निर्भर रहने के कारण पॉकेट में रखने वाला मोबाइल घर में ही पड़ा रहता है।’’
एल्यूमीनियम के छड़ों से बने ऐसे एंटीना की कीमत करीब पांच से सात सौ रुपए होती है। यह इलाके के लोगों को रामनगर और हरनाटांड के बाजारों में आसानी से मिल जाता है। इस एंटीना के जरिए भी केवल बात-चीत ही हो पाती है। इंटरनेट का नेटवर्क नहीं मिल पाता है। ऐसे में यहां के लोग, खासकर युवा सोशल साइट्स और दूसरी वेबसाइट्स की जानकारी होने के बाद भी इनका इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।