अमेरिकी फर्म से पांच लाख डालर की घूस लेने के मामले में पूर्व कस्टम जज के खिलाफ चल रही जांच के सिलसिले में सीबीआई अमेरिका को आग्रह पत्र (लेटर रोगेटरी) भेजने पर विचार कर रही है।
सूत्रों ने बताया कि पूर्व कस्टम जज गौरीशंकर के खिलाफ पिछले साल मामला दर्ज किया था कि उन्होंने अमेरिकी फर्म प्राइड इंटरनेशनल की भारत में सहायक कंपनी से वर्ष 2003 में घूस लेकर उसे फायदा पहुंचाया था। सीबीआई अमेरिका से इस कंपनी के वित्तीय लेन-देन की जानकारी चाहती है।
यह मामला अमेरिकी सरकार द्वारा कस्टम, एक्साइज एंड गोल्ड ट्रिब्युनल के तत्कालीन जज गौरीशंकर को अवैध भुगतान के संबंध में जानकारी देने के बाद दर्ज किया गया था। यह भुगतान 2001 में प्राइड फोरामर इंडिया के खिलाफ कस्टम कमिश्नर के आदेश को पलटने के लिए दिया गया था।
सूत्रों ने बताया कि तेल के लिए खुदाई करने वाले एक उपकरण का दाम काफी कम करके बताने पर कस्टम कमिश्नर ने कंपनी को ब्याज समेत भारी जुर्माना चुकाने का आदेश दिया था। कंपनी ने आरोपी जज को अमेरिका व यूरोपीय देशों के रास्ते धन मुहैया कराया।
जांच के दौरान जब सीबीआई ने छापा मारा तो पता चला कि 2003 में रिटायरमेंट के बाद इस जज ने मुंबई, गोवा और अहमदाबाद में इस धन का निवेश किया था। सीबीआई ने आरोपी जज के फोन रिकार्ड की जांच की तो इस मामले में दो लोगों की और भूमिका संदेह के घेरे में आई, जिसमें एक कंपनी का अधिकारी और दूसरा कस्टम सलाहकार था।