पक्षपात के आरोपों में घिरे टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की जांच करने वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष पीसी चाको ने समिति की मसौदा रिपोर्ट में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को क्लीन चिट दिए जाने के फैसले को सही ठहराया है।
उन्होंने कहा है कि पूरे मामले में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की संलिप्तता साबित करने वाला एक भी तथ्य सामने नहीं आया है।
उन्होंने दावा किया कि समिति का बहुमत गवाही के लिए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को बुलाए जाने के खिलाफ था।
इस पूरे विवाद पर पहली बार खुल कर सामने आए चाको ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा को अपनी बात रखने का मौका देने का दावा किया।
चाको ने कहा कि समिति के समक्ष ढेरों दस्तावेज और गवाहियां हुईं। इन दस्तावेजों और गवाहियों के आधार पर गहन छानबीन के बावजूद एक भी तथ्य ऐसा नहीं मिला जिससे इस मामले में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की संलिप्तता जाहिर होती हो।
उन्होंने कहा कि भाजपा तथा भाकपा के सदस्यों ने बार-बार प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को समिति के समक्ष बुलाने की मांग की, लेकिन समिति के ज्यादातर सदस्य इस मांग के खिलाफ थे।
उन्होंने दावा किया कि 30 सदस्यीय समिति में इस मांग के समर्थक सदस्यों संख्या महज पांच-छह थी। राजा को गवाही के लिए न बुलाए जाने संबंधी आरोपों के बारे में भी उन्होंने खुद का बचाव किया।
उन्होंने कहा कि राजा से उन्होंने खुद बात की थी। इस दौरान उनसे लिखित में समिति के समक्ष गवाही देने के लिए कहा था।
चाको ने उन्हें हटाए जाने की विपक्षी सदस्यों की मांग के संबंध में कहा कि यह मामला अब लोकसभा अध्यक्ष के पास है और मुझे नहीं लगता कि समिति के अध्यक्ष को हटाने का कोई नियम है।
इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर विपक्षी सदस्य उनसे सीधे इस्तीफा मांगते तो वह इस पर विचार कर सकते थे, लेकिन अब चूंकि मामला लोकसभा अध्यक्ष के पास है, इसलिए अब उन्हें ही फैसला करने दीजिए।
चाको ने कहा कि समिति की ड्राफ्ट रिपोर्ट दस्तावेजों और गवाहियों से हासिल तथ्यों पर आधारित है। राजा ने हालांकि सारे फैसले प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को विश्वास में ले कर लेने की बात कही है, मगर वह इसे दस्तावेजों में साबित नहीं कर पाए।
उल्लेखनीय है कि समिति के आधे सदस्यों ने पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष से चाको को हटाने की मांग की है।