हाथ काट लेने संबंधी बयान देकर बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी एक बार फिर मुश्किल में आ गए हैं। डॉक्टरों ने उन्हें 24 घंटे के अंदर खेद जताने का अल्टीमेटम दिया है।
आईएमए के कार्यकारी अध्यक्ष सजदानंद ने कहा है कि अगर मुख्यमंत्री ने 24 घंटे के अंदर खेद नहीं जताया तो वे कठोर फैसला लेने के लिए बाध्य होंगे। जरूरत पड़ी तो वे इस मामले को मानवाधिकार आयोग से लेकर अदालत तक ले जाएंगे। राष्ट्रपति के समक्ष भी इस मामले को उठाया जाएगा।
बयान पर बवाल के बीच मांझी ने शनिवार को सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान की जो आलोचना कर रहे हैं, उन्हें हिंदी मुहावरे का ज्ञान नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर यह मुहावरा हिंदी शब्दकोश में नहीं होगा, तो वो खेद प्रकट करने को तैयार हैं, लेकिन अगर हुआ तो वो हजार बार इसका उपयोग करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि हाथ काटना हिंदी का एक मुहावरा है जिसका अर्थ है अधिकार सीमित करना। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को दिए एक बयान में लापरवाह डॉक्टरों के हाथ काटने की धमकी दी थी। भाजपा ने उनके बयान को तालिबानी तो राजद और कांग्रेस ने गैर मर्यादित करार दिया है।