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भाजपा विधायक की मांग, जिन्ना हाउस बने शहीद स्मारक

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देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्थित पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना हाउस पर पाकिस्तान महावाणिज्य दूतावास खोलना चाहता है, लेकिन इस बीच जिन्ना हाउस को शहीद स्मारक (वार म्यूजियम) बनाने की मांग शुरू हो गई है।
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महाराष्ट्र भाजपा उपाध्यक्ष और मुंबई के भाजपा विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा ने मंगलवार को रक्षा मंत्री मनोहर परिकर से मिलकर एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें उन्होंने मांग की है कि जिन्ना हाउस शहीद स्मारक बनाने का सबसे उपयुक्त स्थान है।

विधायक लोढ़ा ने कहा कि 1965 की पाकिस्तान से हुई जंग में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी टैंक जब्त किए गए थे। इस पाकिस्तानी टैंक को शौर्य के प्रतीक के रूप में जिन्ना हाउस में स्थापित किया जाए। लोढ़ा ने कहा कि भारत ने सबसे ज्यादा युद्ध पाकिस्तान से किया है। उस युद्ध की याद में जिन्ना हाउस को शहीद स्मारक का स्वरूप दिया जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की आजादी के लिए 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध में टी-55 टैंक ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उसे भी विजय के प्रतीक के रूप में जिन्ना हाउस में स्थापित किया जा सकता है। जिन्ना हाउस एनमी एक्ट के तहत भारत सरकार की संपत्ति है। इसलिए इस पर जिन्ना के वंशज या पाकिस्तान का कानूनी तौर पर दावा गलत है।

भाजपा विधायक ने कहा कि वित्त वर्ष 2015-2016 के बजट प्रस्ताव में वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने शहीद स्मारक के लिए धन का प्रावधान किया था।

वार म्यूजियम के लिहाज से जिन्ना हाउस को सबसे प्रासंगिक बताते हुए लोढ़ा ने रक्षामंत्री से मांग की कि बजट प्रावधान के मद्देनजर केंद्र सरकार अपने कब्जे वाले जिन्ना हाउस को वार हाउस में तब्दील करने की प्रक्रिया शुरू करे। लोढ़ा ने कहा कि रक्षामंत्री ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया है।
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1983 से खाली पड़ा है जिन्ना हाउस

पाकिस्तान सरकार इस जिन्ना हाउस में महावाणिज्य दूतावास खोलने की लंबे अरसे से मांग करता रहा है लेकिन इसके लीज के बारे में पाक की अपील को भारत सरकार ने स्वीकार नहीं किया है।

मुंबई के पाश इलाके मालाबार हिल में 2.5 एकड़ भूखंड पर सन 1936 में जिन्ना हाउस का निर्माण मोहम्मद अली जिन्ना ने कराया था।

आजादी की लड़ाई के समय 1944 व 1946 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे पर चर्चा भी इसी जिन्ना हाउस में हुई थी। बंटवारे के बाद जिन्ना भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे।

इसके बाद 1948 में उनकी मौत हो गई। इस बीच 1948 से लेकर सन 1983 तक जिन्ना हाउस में ब्रिटिश डिप्टी हाईकमीशन का दफ्तर था। उसके बाद से जिन्ना हाउस खाली पड़ा है।
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