तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के बाद अब बाबू लाल मरांडी ने भी केंद्र सरकार का साथ छोड़ दिया है। झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) सुप्रीमो ने शनिवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर सरकार से समर्थन वापसी का पत्र सौंपा। दो सांसदों वाली झाविमो के समर्थन वापस लेने के बाद यूपीए-दो में अब 252 सदस्य ही रह गए हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार अल्पमत में नहीं आई है क्योंकि उसे सपा और बसपा का बाहर से समर्थन हासिल है।
मरांडी ने बताया कि केंद्र की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ उनकी पार्टी ने सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा एक अक्तूबर को ही कर दी थी, जिसकी औपचारिकता अब पूरी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि झाविमो कांग्रेस और भाजपा दोनों से समान दूरी बनाते हुए जनता के बीच जाकर भ्रष्टाचार और महंगाई के खिलाफ आंदोलन करेगी। पार्टी ने केंद्र की नीतियों और राज्य में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन का मसौदा तैयार कर लिया है और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र की जनविरोधी नीतियों की वजह से राज्य और देश में जो परिस्थितियां उत्पन्न हुई हैं, वह जग जाहिर है। कांग्रेस के नेतृत्व में बनी सरकार को झाविमो ने धर्मनिरपेक्षता के नाम पर अपना समर्थन दिया था लेकिन विगत दो साल के अंतराल में वर्तमान सरकार के भ्रष्टाचार के कई कारनामे उभर कर सामने आए हैं। इसमें 1.70 लाख करोड़ का टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला, 1.86 लाख करोड़ का कोल ब्लॉक आवंटन घोटाला के अलावा कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला मुख्य है। केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण खाद्य महंगाई चरम पर है।
इसके बावजूद सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के बजाए उल्टे दुनिया के बाजार मूल्य का बहाना बनाकर डीजल, पेट्रोल एवं रसोई गैस की कीमत बढ़ाने का काम कर रही है। देश की बिगड़ी आर्थिक स्थिति को सुधारने के नाम पर एफडीआई को मंजूरी देकर सरकार ने बेरोजगारी बढ़ाने और अर्थ व्यवस्था को गुलामी के रास्ते पर ले जाने की साजिश की है। वहीं राज्य की भाजपा सरकार भी केंद्र के ही नक्शे कदम पर चल रही है।