झारखंड में विधानसभा के लिए तीसरी बार चुनाव हो रहे हैं। केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के साथ गठबंधन किया है।
इस चुनाव में झारखंड की 14-15 फ़ीसदी मुस्लिम आबादी राजनीतिक हिस्सेदारी के मामले में हाशिए पर नज़र आ रही है।
भाजपा अब तक 63 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। लेकिन इसमें किसी मुसलमान का नाम नहीं है। जबकि कांग्रेस ने अब तक तीन और राज्य में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पांच मुसलमानों को टिकट दिया है।
नीरज सिन्हा का विश्लेषण
पिछले साल झारखंड की राजधानी रांची में हुई नरेंद्र मोदी की रैली एक ख़ास वजह से सुर्ख़ियों में रही थी।
रैली में मुसलमानों को बुलाने के लिए भाजपा ने ऊर्दू में निमंत्रण पत्र छपवाया था।
मुसलमानों से संपर्क बढ़ाने और इससे वोट भी कमाने के मकसद से भाजपा ने राज्य में हर स्तर पर अल्पसंख्यक मोर्चे का गठन किया है। लेकिन राज्य में चुनावों में उसने कभी किसी मुसलमान को उम्मीदवार नहीं बनाया।
तीसरा चुनाव
अलग राज्य बनने के बाद से झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा के लिए तीसरी बार चुनाव हो रहे हैं।
भाजपा 73 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। गठबंधन के तहत आठ सीटें उसने आजसू को दी हैं।
भाजपा अब तक 63 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। लेकिन इनमें किसी मुसलमान का नाम नहीं है।
प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा कहते हैं, "मुसलमानों के प्रति पार्टी की सोच सकारात्मक है। प्रदेश में जब भी भाजपा की सरकार बनी मुसलमानों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया। अभी 10 सीटों पर उम्मीदवार तय होने हैं, इसलिए उम्मीद करनी चाहिए।"
भाजपा का सफ़र
भाजपा ने 2009 का विधानसभा चुनाव 67 सीटों पर लड़ा था। उसने 14 सीटें जदयू को दी थीं। उस समय भी भाजपा ने किसी मुसलमान को टिकट नहीं दिया था।
भाजपा को 67 में से 18 सीटों पर जीत मिली थी।
भाजपा ने 2005 का विधानसभा चुनाव 63 पर लड़ा था। जदयू के लिए उसने 18 सीटें छोड़ी थीं। तब भी भाजपा ने किसी मुसलमान को उम्मीदवार नहीं बनाया था। भाजपा ने 63 में से 30 सीटें जीती थीं।
प्रदेश भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष मोहम्मद काज़िम कहते हैं कि अगस्त में रांची में आयोजित मोर्चा के सम्मेलन में प्रदेश के नेताओं ने भरोसा दिया था कि इस बार पार्टी मुसलमानों को भी टिकट देगी।
वो कहते हैं, ''लेकिन रांची से लेकर दिल्ली तक फ़रियाद करने के बाद भी हम हाशिए पर ही रहे।''
मुसलमानों की मौज़ूदगी
मोर्चा के मीडिया प्रभारी तारिक़ इमरान कहते हैं कि बड़ी संख्या में मुसलमान भाजपा का झंडा उठा रहे हैं।
तारिक़ इमरान कहते हैं, ''पाकुड़, मधुपुर, टुंडी, गांडेय, हटिया जैसी सीटों पर मुस्लिम मतदाता प्रभावशाली संख्या में हैं। हमे कम से कम दो टिकटें मिलनी चाहिए थीं।''
वो कहते हैं कि लोग उनसे पूछते हैं कि पार्टी मुसलमानों को टिकट क्यों नहीं देती।
विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अब तक 51 उम्मीदवार घोषित किए हैं। इनमें पार्टी के दो विधायकों अकील अख़्तर और हाजी हुसैन अंसारी समेत पांच मुसलमान हैं।
पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टचार्य कहते हैं भाजपा के मन में अल्पसंख्यकों के प्रति कभी कोई सम्मान नहीं रहा।
कांग्रेस ने अब तक 30 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। इनमें पार्टी के दो विधायकों सरफ़राज़ अहमद और मन्नान मल्लिक समेत तीन मुसलमानों के नाम हैं।
झारखंड़ कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दुबे कहते हैं कि अगली सूची में और भी मुसलमानों के नाम हो सकते हैं।
जीत का फ़ैक्टर
भाजपा और मुसलमान के सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार बलबीर दत्त कहते हैं कि चुनावों में कई फ़ैक्टर प्रभावी होते हैं।
दत्त के अनुसार इसमें जातियां भी अहम हैं और पार्टियां उन्हीं उम्मीदवारों पर दांव लगाती हैं जो जीत सकें।
वो कहते हैं, ''हो सकता है कि भाजपा यह परखती हो कि मुस्लिम उम्मीदवार को मुसलमानों का ही वोट मिलने की गारंटी है या नहीं।''
एदारा-ए-शरिया झारखंड के महासचिव मौलाना क़ुतुबुद्दीन रिज़वी कहते हैं कि इस बार भाजपा का इम्तेहान था।
वो कहते हैं कि भाजपा के शीर्ष नेता कहते रहे हैं कि मुसलमानों पर शक नहीं किया जा सकता, लेकिन सत्ता में भागीदारी के सवाल पर उनकी मंशा स्पष्ट होती रही है।