प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के सवाल पर राजग के सहयोगी दलों में बढ़ रही बेचैनी ने भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है।
गठबंधन में सहयोगी जद (यू) ने जल्द से जल्द प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की मांग की है।
जद (यू) चाहती है कि यह जल्द स्पष्ट हो जाए कि कहीं भाजपा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को तो इस पद का उम्मीदवार नहीं बना रही है, जिसके बाद वह राजग में रहने या बाहर जाने का फैसला कर सके।
वहीं, शिवसेना भी चाहती है कि पीएम पद के उम्मीदवार नाम जल्द सामने आए। हालांकि भाजपा में भी मोदी की उम्मीदवारी पर आम राय नहीं है, मगर पार्टी इस साल के अंत में होने वाले कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव के पूर्व अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती है।
जद (यू) चाहती है कि भाजपा उसे प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जो सबको साथ लेकर चल सके। जाहिर है कि यह रणनीति मोदी को बैकफुट पर धकेलने की है।
जद (यू) ने इशारों में पहले भी कई बार साफ कर दिया है कि मोदी की उम्मीदवारी के साथ ही पार्टी की राजग से विदाई तय है।
भाजपा पर दबाव बनाए रखने के लिए पार्टी ने शनिवार से शुरू हो रही अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में एनडीए का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार जल्द तय करने का एक प्रस्ताव भी पारित कराने की योजना बना ली है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि अगर भाजपा मोदी को मैदान में उतारने का फैसला कर चुकी है तो इसे सार्वजनिक करे, जिससे हमें फैसला लेने में आसानी हो।
जबकि भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी एक ओर मोदी का मिशन 2014 जारी रखेगी, लेकिन सहयोगी दलों को दलील देगी कि यूपीए में भी इस बार पीएम प्रत्याशी घोषित नहीं हो रहा है। इसलिए एनडीए को भी अभी खामोश रहना चाहिए।
भाजपा के एक नेता का कहना है कि कांग्रेस में भी अभी मनमोहन सिंह और राहुल गांधी के नाम को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
इसलिए भाजपा पीएम के सवाल पर फैसला उचित समय पर करने की बात दोहरा रही है, लेकिन एनडीए के घटक दल अब ज्यादा इंतजार करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। खासतौर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही मोदी की भूमिका को लेकर भाजपा से दो टूक जवाब चाहते हैं।
शिवसेना और अकाली दल राजी
प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार जल्द घोषित करने का दबाव शिवसेना की तरफ से भी आया है। लेकिन नई बात यह है कि शिवसेना ने अपनी पुरानी पसंद सुषमा स्वराज की जगह मोदी के नाम पर लगभग हामी भर दी है।
दिवंगत बाल ठाकरे ने पीएम पद के लिए सुषमा स्वराज की पैरवी की थी, लेकिन उनके पुत्र उद्धव यह कह कर मोदी के पक्ष में आ गए हैं कि तब मोदी का नाम दौड़ में शामिल नहीं था।
दरअसल शिवसेना को लगता है कि मोदी के समर्थन के बाद उसे राज्य में बेहद ताकतवर और महत्वपूर्ण गुजराती वोट हासिल हो जाएंगे। हालांकि इस पूरे मामले में राजग की एक सहयोगी अकाली दल चुप है, लेकिन उसे भी मोदी के नाम पर ऐतराज नहीं है।
मोदी के विरोध में क्यों है जदयू
जदयू के लिए बिहार के मुसलिम वोट काफी मायने रखते हैं, जदयू नेताओं को डर है कि यदि मोदी को एनडीए से पीएम का उम्मीदवार बनाया जाता है तो उनकी कट्टर हिंदूवादी छवि के चलते ये मुसलिम मतदाता जदयू का साथ छोड़ देंगे। नीतीश कुमार पहले ही कह चुके हैं कि एनडीए का पीएम पद का उम्मीदवार धर्मनिरपेक्ष छवि का होना चाहिए।
सेक्युलर हैं मोदी
जदयू भाजपा के लिए बहुत अहम सहयोगी है। हमें उम्मीद है कि वह हमारा साथ नहीं छोड़ेगा। जहां तक मोदी की बात है हमारे अध्यक्ष राजनाथ सिंह कह चुके हैं कि मोदी सेक्युलर नेता हैं। मेरी राय भी यही है। मुझे यह कहने में कोई संशय नहीं है कि मोदी सेक्युलर हैं।
-निर्मला सीतारमन, भाजपा प्रवक्ता