पीएम पद के उम्मीदवार के लिए जद-यू की पहली पसंद भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी हैं। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने शनिवार की रात भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह और पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली से मिल कर इशारों-इशारों में अपनी राय स्पष्ट कर दी।
इस दौरान राज्य के राजनीतिक समीकरण समझाते हुए नीतीश ने स्पष्ट कर दिया कि पार्टी गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी को पीएम पद के उम्मीदवार के रूप में किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी। सूत्रों के अनुसार राजनाथ और जेटली के अनुरोध पर ही नीतीश पीएम पद का उम्मीदवार तय करने के लिए भाजपा को साल के अंत तक का समय देने को तैयार हुए हैं।
जद-यू के सूत्रों ने बताया कि नीतीश की दोनों नेताओं से अलग-अलग मुलाकात के दौरान राज्य की राजनीतिक स्थिति पर व्यापक चर्चा हुई। नीतीश ने समझाया कि अगर भाजपा मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाती है तो राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव में दम तोड़ चुका माय (मुसलिम+यादव) समीकरण न केवल फिर से जीवित हो जाएगा, बल्कि यह पूरी तरह राजद के पक्ष में चला जाएगा।
नीतीश ने बताया कि चूंकि इन दो वर्गों के 30 फीसदी से अधिक मतदाता राज्य में हैं, इसलिए हालात संभालना मुश्किल हो जाएगा। जद-यू सूत्र का तो यह भी कहना था कि नीतीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मोदी की उम्मीदवारी को समर्थन कर पार्टी राजनीतिक आत्महत्या करने के बदले अलग राह चुनने के लिए मजबूर हो जाएगी। बातचीत के दौरान इशारों में ही नीतीश ने कहा कि अगर भाजपा फिर आडवाणी को उम्मीदवार बनाती है तो जद-यू के लिए स्थिति सहज होगी।
बताते हैं कि बातचीत के दौरान राजनाथ ने कहा कि फिलहाल राजग में उम्मीदवार के नाम पर चर्चा नहीं हुई है। ऐसे में जद(यू) को जल्द उम्मीदवार घोषित करने की मांग से बचना चाहिए। इस पर नीतीश ने कहा कि उनकी पार्टी जल्द उम्मीदवार घोषित करने की मांग से पीछे हटने को तैयार है, लेकिन मोदी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उसके लिए गठबंधन में बने रहना मुश्किल होगा।
बहरहाल, जद-यू से मोहलत मिल जाने से भाजपा खेमे में राहत है। दरअसल पार्टी की पहले से योजना है कि वह इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद अपने पत्ते खोले। इस दौरान कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और दिल्ली में चुनाव होने हैं, वहां भाजपा की स्थिति ठीक है। पार्टी को लगता है कि इन चुनावों के परिणाम सकारात्मक रहने से भाजपा के पक्ष में देशव्यापी माहौल बनेगा। उसके बाद पार्टी तय करेगी कि वह जद-यू की मांगों के आगे झुके अथवा नहीं।