आरक्षण के आश्वासन के बाद खत्म हुए हरियाणा जाट आंदोलन ने अब भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। जाट और गैर जाट भाजपा सांसद व विधायकों के दबाव में आरक्षण के लिए बनी उच्चस्तरीय कमेटी में आरक्षण के स्वरूप को लेकर मंथन चल रहा है।
जाटों को 27 फीसदी कोटे में शामिल नहीं करने के दबाव में कमेटी एक नए विकल्प पर आगे बढ़ रही है। जिसके तहत स्पेशल ओबीसी कैटेगरी के तहत जाटों को आरक्षण देने का खाका तैयार किया जा रहा है।
साथ ही केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण के लिए भी ओबीसी बिल में संशोधन किया जा सकता है। दोनों मामले बजट सत्र में ही पास करने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
हरियाणा में यह है स्थिति
सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता है। हरियाणा में वर्तमान आरक्षण की बात करें तो एससी और ओबीसी को 47 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है। ओबीसी को ए व बी कैटेगरी बनाकर आरक्षण दिया है।
ए कैटेगरी में खेती करने वाली 5 जातियों को 11 फीसदी और बी कैटेगरी में खेती पर निर्भर व अन्य कारोबार करने वाली 76 जातियों को 16 फीसदी आरक्षण में शामिल किया गया है। जाट समाज भी इस 27 फीसदी आरक्षण में ही शामिल किए जाने को लेकर आंदोलन कर रहा था।