जशोदाबेन ने प्रधानमंत्री की पत्नी के रूप में अपने अधिकारों की जानकारी मांगकर नरेंद्र मोदी के लिए नई मुश्किल खड़ी कर दी। प्रधानमंत्री मोदी शायद ही जशोदाबेन के अधिकारों पर टिप्पणी करें, हालांकि विपक्षी दलों के हाथ बैठेबिठाए एक मुद्दा लग गया है।
उल्लेखनीय है कि जशोदाबेन ने पिछले सप्ताह एक अंग्रेजी दैनिक को दिए साक्षात्कार में कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी उन्हें एक बार बुलाएं तो वे दिल्ली आने के लिए तैयार हैं। जशोदाबेन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से इच्छा जताई थी कि वे नरेंद्र मोदी के साथ रहना चाहती हैं।
हालांकि प्रधानमंत्री के बड़े भाई सोमाभाई मोदी ने जशोदाबेन की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। उन्होंने कहा था कि यह नामुकिन है कि जशोदाबेन मोदी के साथ रहें। ऐसा पहली बार नहीं है कि मोदी के परिजनों ने जशोदाबेन की घर वापसी से इनकार किया हो।
सोमाभाई ने तब भी किया था घर वापसी से इनकार
सोमाभाई ने कहा था कि मोदी राज्य के मुख्यमंत्री रहे, तब भी उनकी मां या घर का कोई सदस्य गांधी नगर स्थिति उनके निवास पर नहीं गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में मोदी के शपथग्रहण में भी परिवार का एक भी सदस्य नहीं शामिल हुआ था।
लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी ने वडोदरा से भरे नामांकन पत्र में जशोदाबेन को अपनी पत्नी बताया था, उस समय जशोदाबेन के घर वालों ने उम्मीद जताई थी कि मोदी शायद उन्हें अपना हक दें।
जशोदाबेन के भाई अशोक भाई ने कहा था कि जशोदाबेन की भक्ति रंग लाई है। उन्होंने कहा था कि जब नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपनी पत्नी माना है तो वे मोदी को अपना 'बनेवी' (जीजाजी) कह सकते हैं।
उस समय भी मोदी के परिजनों ने जशोदाबेन की घर वापसी से इनकार कर दिया था।
1968 में हुई थी मोदी और जशोदा की शादी
सोमाभाई ने उस वक्त कहा था कि नरेंद्र के लिए देश सेवा ही एकमात्र धर्म है। सांसारिक भोगविलास को छोड़कर उन्होंने गृह त्याग कर दिया। 45-50 साल बाद भी नरेंद्र भाई परिवार से अलिप्त हैं।
उल्लेखनीय है कि नरेंद्र मोदी और जशोदाबेन का विवाह 1968 में हुआ था। हालांकि विवाह के चंद दिनों बार ही मोदी ने उन्हे छोड़ दिया। जशोदाबेन बलसाड़ जिले राजोसाणा में प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका रहीं।
इन दिनों वह मेहसाणा जिले के ऊंझा कस्बे के बापा ईश्वरवाड़ा गांव में अपने भाई अशोक मोदी के साथ रहती हैं।