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चुनाव-चिह्न पर जनता परिवार के दलों को बड़ी राहत

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न तो जेडीयू का तीर धनुष किसी और के पास जाएगा और न ही राजद का लालटेन को कोई और झटक पाएगा। दरअसल, विधिवत विलय की स्थिति में चुनाव आयोग पुराने चुनाव चिन्हों को नियमानुसार किसी एक गुट या विरोधी गुट को आवंटित नहीं कर सकता।
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जनसंघ का जनता पार्टी में विलय सहित इतिहास में विभिन्न दलों के विलय के मामले में भी इसी कारण पुराने चुनाव चिन्ह किसी अन्य दल या गुट को आवंटित नहीं गए।

इस बीच जनता परिवार में विलय के बाद नाम और निशान तय करने के लिए बनी कमेटी ने फिलहाल नई पार्टी का नाम समाजवादी जनता पार्टी और चुनाव निशान साइकिल रखने का फैसला किया है।

अंतिम फैसला से पहले कमेटी वरिष्ठ नेता एचडी देवगौड़ा और अभय चौटाला से बातचीत करेगी। जदयू, राजद, सपा और सजपा पहले से ही साइकिल पर सवार होने पर सहमत हैं।
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क्या होगा जनता परिवार का नया नाम?

विलय के बाद जदयू के चुनाव निशान तीर धनुष पर पूर्व सीएम जीतन राम मांझी और राजद नेतृत्व के खिलाफ बगावत का सुर अलाप रहे सांसद पप्पू यादव की ओर से चुनाव निशान लालटेन पर कब्जा करने की चर्चा है। मगर हकीकत में ऐसा संभव नहीं है।

अगर जनता परिवार के सभी छह दलों ने सभी कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए विलय किया तो आयोग पुराने चुनाव निशान को किसी अन्य दल को आवंटित नहीं कर पाएगा।

हालांकि, इसके लिए जनता परिवार के सभी दलों को जिला, राज्य और केंद्र के स्तर पर विलय की प्रक्रिया पूरी करने के बाद एक सम्मेलन का आयोजन करना होगा। सम्मेलन में नए दल का प्रस्ताव पारित करने के बाद इसकी जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी।
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