जम्मू और कश्मीर के हीरानगर और सांबा में पुलिस तथा सेना के ठिकानों पर हमला करने वाले आतंकी हेरोइन जैसे ड्रग्स के नशे में धुत थे।
सेना की ओर से सरकार को सौंपी गई शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि जवाबी कार्रवाई में मारे गए तीनों आतंकी पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर ए ताइबा के गुर्गे थे।
यह रिपोर्ट अस्पताल में गंभीर रूप से घायल टेंपो ड्राइवर रोशन लाल शर्मा के बयान के आधार पर तैयार की गई है।
सेना के शीर्ष अधिकारी ने बताया कि इस तरह के फिदायीन आतंकियों को ऐसे ऑपरेशन पर भेजने से पहले हेरोइन की बड़ी मात्रा दी जाती है ताकि उन्हें धर्मांधता के नाम पर पढ़ाए गए पाठ के अलावा और कुछ याद नहीं रहे।
यहां तक की अपनी मौत का खौफ भी नहीं। सेना के मुताबिक यह लश्कर का पुराना तरीका है।
रोशन लाल ने बताया है कि आतंकी पंजाबी लहजे की उर्दू बोल रहे थे जो पाकिस्तान के पंजाब सूबे में बोली जाती है। गौरतलब है कि लश्कर के करीब 80 फीसदी आतंकी पाकिस्तान के इसी इलाके से हैं।
सेना के मुताबिक इन आतंकियों को बारीकी और फौजी तरीके से हमले करने की ट्रेनिंग कम और धर्म के उन्माद में मरने का पाठ ज्यादा पढ़ाया गया था।
सेना के अधिकारी ने बताया कि यही वजह है कि ये आतंकी इलाके की रेकी किए बिना घुस आए और ऑटो और टेंपो वालों से किसी भी पुलिस थाने और सेना के ठिकाने का पता पूछ रहे थे।
उन्हें इलाके के बारे में मालूम नहीं था और वे लगातार पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे।
अधिकारी ने बताया कि गुरिल्ला लड़ाई की ट्रेनिंग वाला कोई भी आतंकी ऐसी हरकत नहीं करेगा कि वह मिशन पूरा होने से ही पहले मारा जाए।
यह लश्कर के वैसे आतंकी थे जिन्हें ड्रग्स के नशे में रखा जाता है ताकि उन्हें अपने आकाओं के आदेश के अलावा कुछ और नहीं सूझे।
अधिकारी ने बताया कि हेरोइन के सेवन के बाद लंबे समय तक भूख और दूसरी शारीरिक जरूरतों को नजरअंदाज करना आसान होता है। चूंकि इस तरह के ऑपरेशन में तीन से चार दिन लगते हैं।
लिहाजा ड्रग्स के सेवन से कम रसद पानी में ही काम चल जाता है। गौरतलब है कि लश्कर ने 2008 में इसी तर्ज पर दो हमले किए थे।