अमूमन किसी एक मुद्दे पर हमारे राजनेताओं की बहुत कम मेल खाती है। लेकिन दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली और पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम की राय गे राइट्स पर मेल खा गई।
दरअसल, टाइम्स लिटफेस्ट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि था कि समलैंगिकता के मुद्दे पर 2014 में दिए गए फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को पुनर्विचार करना चाहिए।
जेटली के इस बयान के बाद कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम भी उनसे सहमत होते नजर आए। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला सराहनीय था और उसे सुप्रीम कोर्ट को जारी रखना चाहिए था औऱ सर्वोच्च न्यायालय को इसे जारी रखना चाहिए था।