पिछले सप्ताह यूपीए नेतृत्व से सीमांध्र की राजधानी ढ़ूंढ़ने की मिली जिम्मेदारी के बाद इन दिनों ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश आंध्र प्रदेश में डेरा डाले हुए हैं।
वे तेलंगाना के अलग होने के बाद बचे सीमांध्र के विभिन्न जिलों का हेलीकॉप्टर के जरिए हवाई सर्वेक्षण कर सीमांध्र की नई राजधानी के लिए मुफीद जगह की तलाश कर रहे हैं।
रमेश को दिया 45 दिनों का वक्त
कांग्रेस आलाकमान ने सीमांध्र की राजधानी पर सर्वसम्मति बनाने के लिए रमेश को 45 दिनों का समय दिया है।
बताया जा रहा है कि सीमांध्र की राजधानी बनाने के लिए लगभग 8000 एकड़ जमीन की जरूरत है। राजधानी बनाने पर होने वाले खर्च का वहन केंद्र सरकार करेगी।
फिलहाल जयराम ने सीमांध्र की राजधानी के साथ ही आंध्र प्रदेश में कार्यरत कर्मचारियों के बंटवारे के लिए कवायद तेज कर दी है।
तेलंगाना और सीमांध्र राज्यों के बीच सरकारी कर्मचारियों के बंटवारे के मुद्दे और सीमांध्र के लिए नई राजधानी की स्थापना पर वह जल्द ही तीन विशेषज्ञ समितियों का गठन करेंगे।
सरकारी कर्मचारियों पर किया जाएगा गौर
इनमें से दो विशेषज्ञ समितियां राज्य एवं केंद्र सरकारों के कर्मचारियों के बंटवारे पर विचार करेगी। इस समय अविभाजित आंध्र प्रदेश में लगभग 84000 सरकारी कर्मचारी हैं। इन्हें दो राज्यों में बांटा जाएगा।
इन सभी को उनके विकल्पों के आधार पर समायोजित किया जाएगा।
रमेश का कहना है कि एक समिति आईएएस, आईपीएस, आईएफएस जैसी अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के बंटवारे जबकि दूसरी राज्य सरकार के 84000 कर्मचारियों के बंटवारे पर गौर करेगी। समिति उनसे विकल्प हासिल करने के बाद ही निर्णय करेगी।
लगभग 8000 एकड़ जमीन की जरूरत
तीसरी विशेषज्ञ समिति सीमांध्र राज्य के लिए नई राजधानी बनाने के बारे में काम करेगी। जयराम के मुताबिक नई राजधानी के लिए लगभग 8000 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी।
नई राजधानी में बनाई जाने वाली इमारतों के निर्माण पर होने वाले खर्च का भार केंद्र सरकार स्वयं उठाएगी।
केंद्र सरकार सीमांध्र को अगले दस वर्षों तक विशेष पैकेज देने और यहां तीन केंद्रीय विश्वविद्यालय व राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान खोलने की घोषणा पहले ही कर चुकी है।
कई सुझावों पर चर्चा
फिलहाल जयराम सीमांध्र की राजधानी के लिए जगह का चयन करने के वास्ते विभिन्न जिलों का दौरा करने के साथ ही यहां के प्रख्यात व्यक्तियों, विशेषज्ञों और कई समूहों से बात कर रहे हैं।
राजधानी के मुद्दे पर उन्हें विभिन्न जगहों से मिले सुझावों में कुरनूल, तिरुपति, विजयवाड़ा और विशाखापट्टनम सहित कई अन्य शहरों के नाम मिले हैं।