आम आदमी पार्टी को लेकर यूं तो हर राजनीतिक दल में चिंता उभरी है, लेकिन कांग्रेस और भाजपा खास तौर से इस नई चुनौती को लेकर दिक्कत महसूस कर रही है।
तस्वीरों में:- मोदी ने कैसे पटा लिया कांग्रेस का यह सिपहसालार?
अरविंद केजरीवाल की नई संस्कृति वाली राजनीति ने कुछ ऐसी धमाकेदार शुरुआत की है, तो आगामी लोकसभा चुनावों से ऐन पहले सभी पुराने राजनीतिक दलों में इस मुश्किल से निपटने को लेकर चर्चा-परिचर्चा का दौर जारी है।
भाजपा की तरह कांग्रेस भी आम आदमी पार्टी की ताकत को आंक रही है। यह बात और है कि खुले तौर पर इसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आम आदमी पार्टी और नई राजनीति को लेकर कुछ कड़वीं बातें कह डाली और कांग्रेस में कोहराम मच गया।
क्या कहा जयराम ने?
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने राजनीतिक दलों के नेताओं से कहा है कि वे आम आदमी पार्टी का मजाक न उड़ाएं। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो लोग इसका मजाक उड़ा रहे हैं वो यह समझ लें कि यह नई पार्टी जिन मुद्दों को उठा रही है, उन्हें दूसरी शक्ल में दूसरे राज्यों में भी ले जा सकती है।
रमेश ने कहा कि इस देश के नेताओं में सिर्फ कम्यूनिस्ट ही हैं जो आलीशान जीवनशैली और धन के बेहूदा प्रदर्शन की बीमारी से दूर हैं। उन्होंने कहा कि हम आम आदमी पार्टी को नजरअंदाज नहीं कर सकते। क्योंकि उसके नेता भ्रष्टाचार, राजनीति में मूल्य और सादगी जैसे वाजिब मुद्दे उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस आप की राजनीति को बड़े गौर से देख रही है। लेकिन भाजपा आम आदमी पार्टी के उभर कर आने से पूरी तरह अपनी नींद गवां चुकी है। जयराम ने चेताया, "अगर वक्त रहते न चेते, तो राजनीतिक दल खत्म हो जाएंगे।"
ट्रैफिक रोकने से भी हुए खफा!
आर्मी चीफ की सिक्योरिटी की वजह से बुधवार को दिल्ली के ट्रैफिक में फंसे ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश बेहद नाराज दिखे। उन्होंने वीआईपी सिक्योरिटी सिस्टम को हास्यास्पद करार दिया। उन्होंने इसे राज्य के भीतर राज्य और उसके भी भीतर एक राज्य करार दिया और कहा कि वीआईपी में लोगों के प्रति कोई जवाबदेही नहीं दिखती।
सेना प्रमुख के सुरक्षा काफिले की वजह से ट्रैफिक में फंसे रमेश बेहद गुस्से में थे और उन्होंने इसके बारे में रक्षा मंत्री एके एंटनी को चिट्ठी लिखने की बात कही। वह एंटनी को मिलिट्री पुलिस के बारे में भी जानकारी देंगे, जो दिल्ली पुलिस को हटाकर खुद सेना प्रमुखों के लिए रास्ता साफ करने में लगी हुई थी।
रमेश का कहना था कि खुद रक्षा मंत्री एके एंटनी सुरक्षा घेरे का इस्तेमाल नहीं करते। रमेश भी लाल बत्ती वाली गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करते। उन्होंने कहा कि उनकी कार उस समय आर्मी चीफ के घर के सामने रोक दी गई, जब वह तीनमूर्ति में एक बैठक में शामिल होने जा रहे थे।
AAP के अलावा राहुल पर भी मतभेद
कांग्रेस में इन दिनों केवल आम आदमी पार्टी को ही लेकर बवाल नहीं मचा हुआ। राहुल गांधी की ताजपोशी को लेकर भी दोफाड़ नजर आ रहे हैं। एक धड़ा मानता है कि 17 जनवरी को राहुल गांधी के पीएम पद का दावेदार बना देना चाहिए, दूसरा तबका इसके खिलाफ है।
दरअसल, भाजपा की तरफ से नरेंद्र मोदी के सामने आने और विधानसभा चुनावों के बाद आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के तेजी से उभरने की वजह से यह साफ हो गया कि आगामी लोकसभा चुनावों में राजनीतिक दल किसी चेहरे के दम पर लड़ेंगे।
ऐसे में कांग्रेस में भी बहस जारी है कि क्या चुनावों से पहले राहुल गांधी को सामने कर पार्टी कार्यकर्ताओं में नई जान नहीं फूंकनी चाहिए। मनमोहन सिंह साफ कर चुके हैं कि वह इस दौड़ से बाहर हैं, ऐसे में यह बहस और तेज हो गई है।
दिग्गी वचनः पहले जीत तो जाएं हम!
जब पूरी कांग्रेस पार्टी एक बात कहती है, तो महासचिव दिग्विजय सिंह कुछ और ही बयान देते हैं। इसी तरह के एक नए बयान में कांग्रेसी नेता ने कहा कि कांग्रेस को चुनावों से पहले किसी भी नेता का नाम प्रधानमंत्री के दावेदार के रूप में आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा, "पहले जनता को हमें चुनना दीजिए, उसके बाद यह फैसला होना चाहिए।"
आम आदमी पार्टी पर भी उनकी राय जयराम रमेश से अलग हैं। उनका कहना है कि पार्टियों को यह समझ लेना चाहिए कि कानून संसद में बनते हैं, रामलीला मैदान में नहीं।
अपने इस बयान को उन्होंने सीधे अरविंद केजरीवाल से तो नहीं जोड़ा, लेकिन यह जरूर कहा कि केजरीवाल और मोदी, दोनों आत्ममुग्ध हैं और दोनों में मजबूत तानाशाही प्रवृति मौजूद है। उन्होंने कहा, "ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं कि दोनों को सिर्फ अपनी आवाज सुनना पसंद है। ये दूसरों की आवाज सुनना पसंद नहीं करते। इसके चलते मेधा पाटेकर समेत कई अन्य लोग केजरीवाल से दूर चले गए।"
'राहुल हमारे नेता, ऐलान की जरूरत नहीं'
राहुल गांधी को लेकर दूसरे नेताओं ने साफ कर दिया है कि वह उनके नेता हैं और ऐलान कभी भी हो, इससे फर्क नहीं पड़ता। विदेश मंत्री और वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, "हमने राहुल को नेता मान लिया है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मनमोहन सिंह, तीन हमारे प्रमुख नेता हैं। वे आपस में चर्चा करते हैं, फैसले करते हैं। जो भी फैसला होगा, उस पर राहुल से चर्चा की जाएगी।"
खुर्शीद ने कहा, "किसी घोषणा की आवश्यकता नहीं है। घोषणा होगी, तो ही नेता माना जाएगा हमारे साथ यह मजबूरी नहीं है। राहुल इस समय चिड़िया की आंख देख रहे हैं। चुनावों में हमारा लक्ष्य क्या होना चाहिए, उसके बाद क्या होना चाहिए और 20 साल बाद क्या होगा, उस पर फोकस किया जा रहा है।"
जयराम से जुदा राय रखते हुए सलमान ने AAP को चुनौती मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, "आम आदमी पार्टी ने कोई चुनौती नहीं दी है। अगर चुनौती होती, तो मैं इतने आराम से बात नहीं कर रहा होता। उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाया है, जो उनका अधिकार है। लोकतंत्र में कर कसते हैं। वीपी सिंह ने किया था। जेपी ने किया था। लोकतंत्र में इन सभी का योगदान है।"