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जानिए क्यों खत्म किया जगेंद्र के परिजनों ने धरना

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जगेंद्र की मौत के बाद न्याय दिलाने के लिए शुरू की गई लड़ाई क्या अधर में छोड़ दी गई है? यह सवाल सोमवार को पूरे दिन पत्रकारों सहित तमाम राजनैतिक दलों और लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। घटना के बाद से जगेंद्र के परिवार के साथ न्याय की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर शामिल रहे लोग ही अब कह रहे हैं कि जब परिवार ने ही जंग अधूरी छोड़ दी है तो वे क्या कर सकते हैं।
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जगेंद्र के मामले में पूरे देश के पत्रकार संगठन एकजुट होकर लड़ाई को आगे बढ़ाने और परिवार के लोगों को न्याय दिलाने के लिए आगे आए गए। देश भर में धरना प्रदर्शन, आंदोलनों को दौर शुरू हो गया। परिवार के लोग भी जगेंद्र की लड़ाई को आगे बढ़ाने सहित कई मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठ गए, लेकिन रविवार रात अचानक सारा घटनाक्रम बदल गया।

जगेंद्र के पिता और छोटा बेटा बिना किसी को जानकारी दिए रात में लखनऊ चले गए और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसके बाद सहायता राशि, नौकरी और जमीन से कब्जा हटाने की घोषणा हो गई। सवाल उठता है कि क्या जगेंद्र सिंह की ओर से शुरू की गई लड़ाई को अधर में छोड़ दिया गया है? जगेंद्र सिंह के जीवित रहते भी समझौते आदि की बात चलती रही, लेकिन जगेंद्र ने इससे इंकार करते हुए न्याय की मांग करते रहे।
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क्या कहते हैं जगेंद्र के परिजन और नेता

'रविवार रात ससुर और पुत्र लखनऊ क्यों गए, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैं सो रही थी। पहले मुझे जानकारी थी कि ससुर दवा लेने लखनऊ गए हैं। बड़े लोगों ने जो फैसला किया है, वह सही होगा। जब तक ससुर और पुत्र वापस नहीं आ जाते हम लोग धरने पर बैठे रहेंगे।'
-सुमन सिंह, पत्रकार जगेंद्र की पत्नी

'मैं सीबीआई जांच की मांग पर कायम हूं। मंत्री को जेल भिजवाएंगे। जब तक पापा के दोषी जेल नहीं जाते हम चुप कैसे बैठ सकते हैं।'
-राघवेंद्र सिंह, पत्रकार जगेंद्र का बड़ा पुत्र

बिना सूचना लखनऊ जाने से लगा धक्का
'मैं पहले ही दिन से जगेंद्र के परिवार के लोगों के धरने पर बैठी थी। सोमवार सुबह पता चला कि जगेंद्र के पिता और पुत्र लखनऊ गए हैं तो इससे मुझे गहरा धक्का लगा है। फैसले से पहले धरने में सहयोग कर रहे लोगों से जरूर बात करनी चाहिए थी।'
-संतोष शर्मा, तहसील अध्यक्ष कांग्रेस महिला प्रकोष्ठ पुवायां

न्यायालय का निर्णय होगा उजाले की किरण
'जगेंद्र के मामले में सरकार शुरू से ही लीपापोती में लगी थी। पत्रकार को न्याय दिलाने के सभी लोग एकजुट हुए थे। पुलिस बचाव में जुटी रही, परिवार के लोगों का मनोबल तोड़ा गया। सबूत नष्ट कर दिए गए और गवाहों को तोड़ लिया गया। डीआईजी भी सरकार की मंशा के तहत ही खुटार आए थे और अकेले में बातकर परिवार को तोड़ा गया। मैंने सुबह ही अधिकारियों को धरने से हटने के बारे में लिखकर दे दिया है। मुझे न्यायालय के फैसले का इंतजार है जो अंधेरे में रोशनी जैसा होगा।'
-रागिनी सिंह, भाजपा नेता शाहजहांपुर

पहले ही कर देनी थी सहायता की घोषणा
'मुख्यमंत्री ने पत्रकार के परिवार को मदद देकर सराहनीय निर्णय किया है, लेकिन यह निर्णय पहले ही लिया जाना चाहिए था। मैं अब भी सीबीआई जांच की मांग पर कायम हूं। सीबीआई जांच से ही पूरे मामले की निष्पक्ष ढंग से विवेचना हो सकेगी और पत्रकार की आत्मा को न्याय मिल सकेगा।'
-देवेंद्रपाल सिंह, पूर्व विधायक ददरौल, शाहजहांपुर

एसडीएम ने भरवाया शस्त्र लाइसेंस का आवेदन

मुख्यमंत्री की ओर से मदद का ऐलान होने के बाद एसडीएम लालबहादुर और सीओ उमेश शर्मा खुटार पहुंचे और धरना स्थल पर जाकर जगेंद्र के बड़े पुत्र राघवेंद्र सिंह की ओर से शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन पत्र भरवाया। जगेंद्र के परिवार को शस्त्र लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इसके बाद एसडीएम लालबहादुर, सीओ उमेश शर्मा, तहसीलदार पीएन सिंह भारी पुलिस फोर्स और पीएसी के साथ गांव दिलीपपुर पहुंचे। यहां पर समिति की भूमि की पैमाइश कर सदस्य सुमेर सिंह की जमीन की पैमाइश की गई और पौत्र राजन की मौजूदगी में कब्जा दिलाया गया। जमीन का यह प्रकरण लगभग 25 वर्ष से लंबित चल रहा था।

मुख्यमंत्री ने दिलाया है न्याय का भरोसा
'मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि मेरे पुत्र के प्रकरण में पूरा न्याय किया जाएगा और निष्पक्ष जांच होगी। जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने परिवार को 30 लाख रुपये, मेरे पौत्रों को नौकरी, जमीन छुड़ाने का आश्वासन दिया है। मैं इससे संतुष्ट हूं। मुझे मुख्यमंत्री और सरकार पर पूरा भरोसा है।'
-सुमेर सिंह, पत्रकार जगेंद्र सिंह के पिता
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डीआईजी के आने के बाद से ही बदल गए थे हालात

एक बड़ा सवाल लोगों के जेहन में चल रहा है कि आखिर डीआईजी अकेले में परिवार के लोगों को ऐसी क्या घुट्टी पिला गए कि आठ दिन तक सीबीआई जांच और आरोपी मंत्री की बर्खास्तगी की मांग को लेकर धरने पर बैठे परिवार ने दोनों महत्वपूर्ण मांगों से किनारा कर लिया। आखिर वह कौन से कारण रहे हैं कि जगेंद्र के पिता अपने पौत्र के साथ बिना किसी को जानकारी दिए रात के अंधेरे में लखनऊ रवाना हुए।

जगेंद्र सिंह के जल जाने और आरोप राज्यमंत्री सहित पुलिसकर्मियों पर आरोप लगा तो सरकार सहित पूरी मशीनरी सक्रिय हो उठी। लखनऊ अस्पताल में भर्ती जगेंद्र सिंह से भी कुछ लोगों ने मिलकर मामले में राजीनामा करने अथवा मंत्री का नाम न लेने के लिए साम, दाम, दंड, भेद का सहारा लिया, लेकिन जगेंद्र टस से मस नहीं हुए।

मृत्यु पूर्व उनके तमाम वीडियो इस बात के गवाह हैं। इसके बाद जगेंद्र सिंह ने दम तोड़ दिया। जगेंद्र सिंह का शव खुटार स्थित घर आया तो शोक व्यक्त करने वालों की भीड़ में तमाम ऐसे चेहरे थे जो चाहते थे कि परिवार के लोग दस से बीस लाख रुपए की रकम लेकर चुप बैठने का फैसला कर लें, लेकिन बात नहीं बनी और राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा सहित कई लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई।

परिवार के लोग 14 जून से सीबीआई जांच, राज्यमंत्री की बर्खास्तगी, परिवार को मदद, जगेंद्र के पुत्रों को नौकरी आदि मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए। इससे प्रशासन और सरकार तक में हड़कंप मच गया। धरना प्रदर्शन से लेकर पूरे मामले को तूल देने में जगेंद्र के परिवार के एक करीबी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इससे मामले को निपटाने में सरकार और राज्यमंत्री के करीबियों की बैचेनी बढ़ गई। खुटार के एक नेता, पुवायां के तीन बड़े नेता इस मामले को निपटाने का प्रयास करने लगे, लेकिन मामला समाप्त होने में जिन लोगों को नुकसान होता नजर आ रहा था, उन्होंने मामले को उलझाए रखा।

हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख नजदीक आने से सरकार की बैचेनी बढने लगी। राज्यमंत्री पर गैंगरेप का आरोप लगाने वाली और जगेंद्र के जलने के समय खुद को चश्मदीद बताने वाली महिला ने बयानों में जगेंद्र के खुद आत्मदाह करने की बात कही और फोरेंसिक रिपोर्ट जगेंद्र के खिलाफ जाने का अंदेशा होते ही आरोपियों के चेहरों पर मुस्कान तैर गई।
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