अगर आप बच्चों को प्लास्टिक की बोतल से दूध पिलाते हैं तो सावधान हो जाएं। बाजार में मिलने वाली दूध पिलाने की बोतल में बिसफीनॉल रासायनिक द्रव्य की कोटिंग होती है। बोतल में गर्म दूध डालने पर यह रसायन दूध में मिलकर बच्चे के शरीर में पहुंचकर नुकसान करना है। दूध की बोतल के अलावा कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड फूड को नमी से बचाने के लिए कई कंपनियां प्लास्टिक में इसी खतरनाक रासायनिक की कोटिंग करती हैं। रासायनिक शरीर में पहुंचने पर हार्ट, गुर्दे, लीवर और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है।
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के फिजियोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जयंती पंत और एनॉटमी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. महेंद्र कुमार पंत ने अपनी रिसर्च में यह दावा किया है। बीजे मेडिकल कॉलेज अहमदाबाद में आयोजित सेमीनार में डॉ. महेंद्र और डॉ. जयंती की रिसर्च को बाकायदा प्रथम पुरस्कार भी मिला है।
डॉ. जयंती और डॉ. महेंद्र की इस रिसर्च को ‘‘बिशफिनोल ए टॉक्सी केमिकल रिलीज्ड फार्म प्लास्टिक प्रोड्यूज कार्डियो रेसपिरेटरी रेनल एंड हैपेटिक चेंजेज’’ विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सेमीनार में शामिल किया गया था। डॉ. जयंती पंत के मुताबिक बिसफीनॉल खतरनाक रासायनिक द्रव्य है।
उन्होंने बताया कि बच्चों की दूध की बोतल, अधिकतर कोल्ड ड्रिंक्स की बोतल और प्लास्टिक पैक्ड फूड के पैकेट के अंदर बिसफीनॉल की कोडिंग होती है। इसकी कोडिंग से खाद्य पदार्थों में नमी नहीं आती है। इससे वे लंबे समय तक खराब नहीं होते हैं। डॉ. जयंती के मुताबिक बिसफीनॉल रासायनिक शरीर में पहुंचने पर गुर्दे, लीवर, फेफड़े और हार्ट के लिए घातक है। रासायन सामान्य व्यक्ति का ब्लड प्रेसर तेज कर देता है।
डॉ. महेंद्र पंत के मुताबिक बिसफीनॉल रासायनिक से बचने के लिए खरीददारी करते वक्त विशेष ध्यान देने की जरूरत है। प्लास्टिक में पैक्ड फूड और कोल्ड ड्रिंक की पैकिंग में त्रिकोणीय मार्क होता है। त्रिकोणीय मार्क में एक से लेकर सात तक संख्या अंकित होती है। तीन से लेकर सात संख्या वाली प्लास्टिक वस्तु का उपयोग खाने और पीने में प्रयोग नहीं करना चाहिए। डॉ. महेंद्र के मुताबिक अमेरिका और चीन में एक सर्वे में 90 फीसदी नागरिकों की पेशाब की जांच में बिसफीनॉल रासायनिक द्रव्य पाया गया है।