केंद्र सरकार ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा कि लोकसभा अथवा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद संवैधानिक रूप से अनिवार्य नहीं है और लोकसभा में वर्तमान समय में किसी भी दल के पास इस पद पर दावा करने के लिए जरूरी 55 सांसद भी नहीं हैं।
सरकार की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने एक याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। मुख्य न्यायमूर्ति जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडलॉ की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति करना अनिवार्य नहीं है।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति चौथी लोकसभा के समय से शुरू हुई थी और 1969-70 व 1988-89 की अवधि के दौरान किसी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता नहीं मिली थी।