देश में बेरोजगारी का आलम किसकदर गंभीर हो चला है कि एक आईटी ग्रेजुएट अपना एजुकेशन लोन चुकाने के लिए कैब ड्राइवर के तौर पर काम करने को मजबूर है।
हम बात कर रहे हैं 24 वर्षीय आर अरिवाझगन जो चेन्नई में ओला कैब के ड्राइवर हैं। वो महज एक ड्राइवर नहीं उनका अंदाज भी बेहद खास है।
दरअसल, अगर कोई उनकी कैब में बैठता है तो वो बाकायदा एसी का लेवल कैब में बैठने वाले शख्स के अनुरूप करते हैं जिससे उन्हें कोई परेशानी नहीं हो। इतना ही नहीं कैब ड्राइव करने से पहले वो बैठने वाले शख्स को टॉफी भी खिलाते हैं।
शाम को अपनी किराए की कार को पार्किंग में खड़ी करने के बाद अरिवाझगन अपने असली जॉब में जुटते हैं। अरिवाझगन शाम से रात के 2.30 बजे तक एक आईटी कंपनी में सिस्टम एडमिस्ट्रेटर के तौर काम करते हैं।
दो नौकरी से चला रहा घर का खर्च
कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट से जब पूछा गया कि आखिर वो कैब ड्राइवर के तौर पर काम क्यों करते हैं? इस पर अरिवाझगन ने बताया कि वो सुदूर गांव धरमपुरी से हैं। उन्होंने बताया कि आईटी उनका करियर है, लेकिन कैब ड्राइवर के तौर पर वो जो भी कमाते हैं उससे एजुकेशन चुकाते हैं।
अरिवाझगन ने बताया कि उन्हें सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर के तौर उन्हें 9,500 रुपये की सैलरी मिलती है। जिससे परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल है।
हालांकि अरिवाझगन ने बताया कि कैब ड्राइवर के तौर पर काम करने से मुझे उससे दोगुना पैसे मिल जाते हैं। जिसके जरिए मैं अपने एजुकेशन लोन का ब्याज 6,000 रुपये चुकाता हूं।
अरिवाझगन ने अपनी पारिवारिक स्थिति के बारे में बताया कि उनके पिता एक किसान हैं। उन्होंने ही पढ़ाई के लिए दो लाख का लोन अपने बेटे के लिए लिया। उन्हें उम्मीद थी कि अपनी खेती के जरिए वो इसे चुकता कर लेंगे। लेकिन लगातार बारिश और खेती में नुकसान के चलते परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया।
घर की हालत बेहद खराब
फिलहाल मेरे पिता बंगलुरू में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में श्रमिक के तौर पर काम करके परिवार का गुजारा कर रहे हैं। अरिवाझगन के एक भाई ने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लिया है और नौकरी की तलाश कर रहा है।
कैब ड्राइविंग के अरिवाझगन को करीब 800 रुपये रोजाना मिलते हैं। जिसका 30 फीसदी उन्हें मिलता है बाकी कार मालिक ले लेता है। देर रात 2.30 बजे घर पहुंचने पर करीब 4 घंटे ही वो सो पाते हैं। रोजाना सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक वो कैब चलाते हैं। इसके बाद रात की नौकरी पर जाते हैं।
उनके मुताबिक उनका ये शिड्यूल थोड़ा थकान भरा होता है लेकिन लोन चुकाने के लिए ऐसा करना पड़ता है। अरिवाझगन मानते हैं उनके पास हुनर तो है लेकिन उनकी अंग्रेजी बेहद कमजोर है। जिसके चलते उन्हें अच्छी नौकरी नहीं मिल रही है।
हालांकि उनके मुताबिक वो भले ही प्रोफेसनली उतने मजबूत नहीं हैं। लेकिन अपने प्रयासों से उन्हें विश्वास है कि वो बहुत अच्छे हैं। इसके साथ-साथ वो ये भी कहते हैं कि मैं अपने बच्चों को जब भी पढ़ाऊंगा तो कोशिश करूंगा वो अंग्रेजी माध्यम से ही पढ़ें। जिससे उन्हें परेशानी नहीं हो।