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स्पेस मार्केर्टिंग के जरिए भारत का 'कमाऊ पूत' बना इसरो

Thu, 17 Dec 2015 09:26 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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चांद पर पानी की खोज करने में सफलता हासिल करने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) फिर से चांद को खंगालने के साथ ही सूरज की ओर भी कदम बढ़ाएगा। बस्तियां बसाने की संभावना तलाशने के लिए इसरो जहां वर्ष 2017 में चंद्रयान 2 सेटेलाइट को चांद पर भेजेगा, वहीं इसकी योजना वर्ष 2019 में सोलर मिशन के तहत आदित्य -1 सूरज पर भी छलांग लगाने की है।
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इस बीच अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र में भारत को दुनिया की महाशक्ति बना कर अपनी प्रतिभा का पहले ही लोहा मनवा चुका इसरो अब देश का कमाऊ पूत भी साबित हो रहा है। संस्थान ने बीते डेढ़ साल में स्पेस मार्केर्टिंग में 1.5 करोड़ डॉलर और 8 करोड़ यूरो की कमाई की है।

इस क्रम में सिंगापुर में 6 सेटेलाइट लांच करने के बदले इसरो को 2.60 करोड़ रुपये हासिल हुए। स्पेस मार्केटिंग में तेजी से अपना पांव पसार रहे इसरो को कई अन्य देशों से सेटेलाइट लांच कराने के दर्जनों प्रस्ताव मिले हैं।
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मेक इन इंडिया में अहम भूमिका निभाएगी इसरो

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि यह संस्था भविष्य में प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया अभियान को हकीकत में बदलने के लिए बड़ी भूमिका निभाएगी।

लोकसभा में राज्य मंत्री सिंह ने बताया कि इसमें अब कोई संदेह नहीं है कि इसरो ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को महाशक्ति बना दिया है। उन्होंने कहा कि पहले हमने चांद पर पानी ढूंढा अब चंद्रयान 2 के जरिए चांद पर बस्तियां बसाने की संभावना तलाशेंगे।

उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि अगर इसरो इस अभियान में सफल रहा तो अभी से चांद पर प्लाट बेचे जाने की इच्छा रखने वालों की मनोकामना पूरी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इसरो की चांद पर ही नहीं बल्कि सूर्य पर भी अनुसंधान की योजना है। इसी योजना के तहत संस्थान 2019 में सोलर मिशन के तहत सेटेलाइट आदित्य-1 सैटेलाइट भेजेगा।
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