मंगल मिशन की सफलतापूर्वक लांचिंग के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन के साथ जीएसएलवी के उड़ान परीक्षण की भी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
आगामी 15 दिसंबर को इसका प्रक्षेपण किया जा सकता है। इसकी सफलता से प्रक्षेपण के मामले में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन ने कहा, ‘जीएसएलवी को लेकर हमने अपने सभी प्रयास करने शुरू कर दिए हैं। श्रीहरिकोटा में जीएसएलवी को लेकर तैयारियां चल रही हैं। यह 18 अक्तूबर को शुरू हो गया था। अब 15 दिसंबर को लांच किया जाएगा।’
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इस स्वेदशी क्रायोजेनिक इंजन का सबसे पहली बार परीक्षण 15 अप्रैल, 2010 को किया गया था, लेकिन वह विफल रहा था।
इस साल 19 अगस्त को इसरो ने एक और प्रयास किया था, लेकिन 10 दिन पहले ही रॉकेट के दूसरे हिस्से में रिसाव की वजह से इसे स्थगित कर दिया गया था।
जीएसएलवी एक तीन चरण का विमान है। यह 49 मीटर लंबा और 414 टन वजनी है।