इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ कांड को लेकर आमने-सामने आई सीबीआई और आईबी में अब तनाव घट रहा है।
आईबी निदेशक आसिफ इब्राहीम और सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि देश की दोनों शीर्ष एजेंसियों के बीच परस्पर तनाव की खबरों से न सिर्फ दोनों विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के मनोबल पर असर पड़ रहा था, बल्कि आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा हो सकता था।
इसलिए इशरत जहां मामले की जांच को बिना प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाए दोनों ही एजेंसियों ने तय किया है कि कानून, नियमों और सबूतों के मुताबिक इस मामले में आगे काम होना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक दोनों एजेंसियों के बीच यह सहमति बन गई है कि इशरत मामले में विवादित आईबी अधिकारी राजेंद्र कुमार के खिलाफ तभी कोई कार्रवाई की जाएगी जब उनकी संलिप्तता के ठोस सबूत मिलेंगे।
ऐसा होने पर सीबीआई उन सबूतों को आईबी नेतृत्व से साझा करेगी और अगर वास्तव में सबूत मजबूत हुए तो आईबी भी कोई प्रतिरोध नहीं करेगी।
बताया जाता है कि जब राजेंद्र कुमार के खिलाफ सीबीआई की संभावित कार्रवाई को लेकर आईबी के भीतर बेहद तनाव का वातावरण था, तब आईबी निदेशक आसिफ इब्राहीम ने सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा से मिलकर कहा था कि वह राजेंद्र कुमार के खिलाफ सीबीआई द्वारा जुटाए गए सबूत जरूर देखना चाहेंगे, जिनके आधार पर सीबीआई उनके खिलाफ कार्रवाई करना चाहती है।
सूत्रों के मुताबिक आईबी निदेशक ने यह भी कहा था कि कोई भी कार्रवाई तभी की जाए जब ठोस सूबत हों जो अदालत में टिक सकें। इस पर सीबीआई निदेशक ने यह भरोसा जताया था कि जो भी कार्रवाई होगी तभी होगी जब ठोस सबूत होंगे।
आईबी के शीर्ष स्तर के सूत्रों का कहना है कि राजेंद्र कुमार प्रकरण एक घटना है, जिसकी चर्चा तो पूरे विभाग में हैं लेकिन उसकी वजह से आईबी के अधिकारी और कर्मचारी काम नहीं कर रहे हैं, या सिर्फ रुटीन सूचनाएं दे रहे हैं, सरासर गलत है। बल्कि आईबी के भीतर राजेंद्र कुमार को लेकर अलग अलग राय है।
कुछ अधिकारी इस मामले में सीबीआई कार्रवाई को गलत मानते हैं तो कई अधिकारी और कर्मचारी मानते हैं कि जिस तरह सेना, नौकरशाही और दूसरे संस्थानों में आरोपी अधिकारियों की जांच होती है, उसी तरह एक आईबी अधिकारी की भी अगर जांच हो रही है तो इसमें क्या गलत है।
आखिर राजेंद्र कुमार के अलावा भी कई अधिकारी राजधानियों और संवेदनशील केंद्रों पर तैनात रहे हैं, लेकिन उन पर कभी उंगली नहीं उठी।
यहां तक कि गुजरात में राजेंद्र कुमार के पहले और बाद में भी आईबी के संयुक्त निदेशक तैनात रहे हैं, उन पर भी उंगली नहीं उठी।
हाल ही में मीडिया के कुछ हिस्सों में आई ऐसी खबरें कि राजेंद्र कुमार प्रकरण से नाराज आईबी ने सूचनाएं और जानकारियां देना बंद कर दिया है, को आईबी के शीर्ष अधिकारी पूरी तरह खारिज करते हैं।
आईबी के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि ब्यूरो में कामकाज ठप होने का कोई सवाल ही नहीं और न ही किसी एक घटना विशेष से एजेंसी के मनोबल पर कोई विपरीत असर पड़ता है।