इशरत जहां एनकाउंटर में मारे गए उसके तीन साथियों में से दो कथित तौर पर पाकिस्तानी थे। इनकी पहचान के लिए इनाम की घोषणा के पीछे सीबीआई की मंशा पूरी साजिश की जड़ तक पहुंचना है।
सीबीआई को भरोसा है कि पांच लाख रुपये की चाहत में जिशान जौहर और अमजद अली राणा के बारे में जो जानकारी मिलेगी उससे पूरे एनकाउंटर की साजिश के ठोस सुराग मिलेंगे। अब तक की खुफिया जानकारी के मुताबिक जौहर और राणा पाकिस्तानी थे।
सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कहा कि इन दोनों की पहचान के लिए इनाम की घोषणा का मकसद घटनाक्रम और उसके पीछे की साजिश की जड़ तक पहुंचना है।
इनकी पहचान पाकिस्तानी नागरिक के तौर पर बताई जा रही है, लेकिन खुफिया एजेंसी को यह नहीं पता कि दोनों भारत कैसे आए और इशरत तथा उसके भारतीय साथी जावेद से उनका संपर्क कैसे हुआ।
अब तक की जांच के मुताबिक गुजरात पुलिस के अधिकारी बंजारा व उनके साथी और आईबी अधिकारी राजेंद्र कुमार ने राणा को एनकाउंटर से करीब दो महीने पहले और जौहर को एक महीने पहले ही अपनी गिरफ्त में लिया था। इसके बाद 15 जून 2004 के एनकाउंटर से दो दिन पहले इशरत और जावेद को उठाया गया था।
गौरतलब है कि सीबीआई इस मामले की अतिरिक्त चार्जशीट में संदिग्ध आईबी अधिकारी राजेंद्र कुमार का नाम आरोपी के तौर पर शामिल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
साथ ही चार्जशीट में पूरी घटना की साजिश का ब्यौरा भी दर्ज किया जाएगा। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक साजिश के राजनीतिक तार भी जुड़ते नजर आ रहे हैं।