इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध) पीपी पांडेय की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया। मुठभेड़ के समय पांडेय अहमदाबाद में संयुक्त आयुक्त के पद पर तैनात थे।
हाल ही में विशेष अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। उन्हें 2004 में इशरत व तीन अन्य को फर्जी मुठभेड़ में मारने के मामले में आरोपी बनाया गया है।
जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा व जस्टिस मदन बी लोकुर की पीठ के सामने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पांडेय की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने तर्क दिया कि विशेष अदालत की ओर से गिरफ्तारी का आदेश उचित नहीं है।
उनके मुवक्किल की ओर से ट्रायल और जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है। ऐसे में उन्हें गिरफ्तार किए जाने संबंधी वारंट जारी किया जाना सही नहीं है। सीबीआई की ओर से इस मामले में दाखिल किए गए आवेदन पर विशेष अदालत ने यह आदेश जारी किया।
अधिवक्ता ने पांडेय के खिलाफ जारी वारंट पर रोक लगाने और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि मेरे मुवक्किल के खिलाफ बेबुनियादी आरोप लगाए गए हैं।
एक सहकर्मी आईपीएस अधिकारी उन्हें जानबूझकर फंसा रहा है, क्योंकि वह उनसे ईर्ष्या करता है। हालांकि पीठ ने अधिवक्ता के तर्क पर सिर्फ सीबीआई को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब तलब किया है।
एडीजीपी पांडेय को विशेष अदालत ने पहले दो बार समन जारी किए थे। लेकिन उनके अदालत में पेश न होने पर सीबीआई ने गिरफ्तारी का वांरट जारी करने की मांग की। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया।
क्या था मामला
उल्लेखनीय है कि मुंबई की रहने वाली इशरत जहां और उसके अन्य तीन साथियों प्रणेश कुमार पिल्लई उर्फ जावेद शेख, अमजद अली और जीशान जोहर को 15 जून, 2004 को अहमदाबाद के पास एक फर्जी मुठभेड़ में मारा गया था।
हाल ही में सीबीआई ने एडीजीपी पांडेय के उत्तर प्रदेश स्थित पुश्तैनी निवास में भी छापा मारा था। लेकिन एजेंसी को सफलता नहीं मिली थी।
गुजरात पुलिस का कहना था कि पुलिस मठभेड़ में मारी गई इशरत और उसके साथी लश्कर आतंकी थे और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से गुजरात की सीमा में प्रवेश कर रहे थे।
इस मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई थी।