इशरत जहां ‘फर्जी’ एनकाउंटर मामले में सीबीआई की स्थानीय अदालत ने नरेंद्र मोदी के खासमखास अमित शाह को राहत देते हुए उनके खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है।
शाह और अहमदाबाद के पूर्व पुलिस आयुक्त केआर कौशिक को इस मामले में आरोपी के तौर पर शामिल करने की मांग की गई थी। 15 जून, 2004 को एनकाउंटर में इशरत के साथ मारे गए तीन अन्य में से एक प्रणेश पिल्लई उर्फ जावेद शेख के पिता गोपीनाथ पिल्लई ने यह याचिका दायर की थी।
सबूतों के अभाव में याचिका खारिज
विशेष सीबीआई जज गीता गोपी ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि चार्जशीट में सीबीआई के बयान शाह और कौशिक को बतौर आरोपी अभ्यारोपित करने के लिए काफी नहीं है और इस मौके पर उनकी याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सीबीआई ने अपने हलफनामे में सात मई को अमित शाह को सबूतों के अभाव में ‘क्लीन चिट’ दे दी थी।
हालांकि एजेंसी ने एक पूरक आरोप पत्र भी दाखिल किया है, लेकिन अदालत ने उस पर संज्ञान नहीं लिया क्योंकि सीबीआई ने अधिकारी को आरोपी के तौर पर शामिल करने के लिए गृह मंत्रालय से अनुमति नहीं मांगी है।
पूर्व आईपीएस ने लगाया था आरोप
अदालत ने कहा कि बयानों को तब तक संज्ञान में नहीं लिया जा सकता जब तक वे कोर्ट की जांच के हिस्सा नहीं बन जाते।
हलफनामे में कुछ गवाहों और आरोपी आईपीएस अधिकारियों ने कथित तौर पर इस मामले में शाह और कौशिक के शामिल होने का आरोप लगाया था।
सीबीआई ने कहा था कि कौशिक के खिलाफ एनकाउंटर में शामिल होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं और उन्हें इस केस में गवाह भी बना दिया गया है।
एक अन्य आरोपी आईपीएस अधिकारी एनके अमीन की याचिका खारिज करने की मांग पर कोर्ट ने कहा कि उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए इस पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।