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'आतंकी' आरिफ ने किए सनसनीखेज खुलासे

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आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) में शामिल होने गए आरिफ मजीद (23) ने स्वदेश लौटकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सामने कई अहम खुलासे किए हैं। उसने बताया है कि आईएस में अभी भी 13 भारतीय हैं। हालांकि मजीद के बयानों की पुष्टि करने को एनआईए उसके नार्को टेस्ट करने की तैयारी में है।
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पूछताछ में मजीद ने बताया कि वह और उसके तीन मित्र शाहीन टंकी, फहाद शेख व अमन टांडेल इस्लामिक देश में रहने की ख्वाहिश रखते थे। उन्होंने करीब 22 हजार वेबसाइटें देखी। इसी दौरान उन्हें आईएस के बारे में पता चला। फिर उन्होंने सीरिया जाने का निर्णय लिया।

आईएस में शामिल होने की शुरुआत फेसबुक से
मजीद ने खुलासा किया कि उन्हें फेसबुक पर ताहिरा भट नाम की महिला मिली। महिला ने उनका ब्रेनवाश किया। इसने इन्हें आईएस के दो आतंकियों के नंबर दिए, जिन्होंने उनके बगदाद पहुंचने पर संगठन में शामिल करने में मदद की। एनआईए को आशंका है कि  संभवत: महिला की प्रोफाइल नकली है।
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बदले गए नाम
25 मई को बगदाद पहुंचने के बाद चारों ने अबु फतिमा से संपर्क किया। अली नाम के व्यक्ति ने उन्हें साक्षात्कार के बाद संगठन से जोड़ा। इसके बाद उनके नाम बदले गए। आरिफ मजीद मजीद अबु अली अल-हिंदी बना। वहीं, फहाद अबु बकर अल हिंदी, अमन, अबु अमर अल हिंदी और शाहीन अबु उस्मान अल हिंदी रखा गया।

हथियार चलाने का प्रशिक्षण मिला
मजीद ने बताया कि रूक्का में अन्य 50 लोगों के साथ उन्हें 25 दिन तक शरीयत के बारे में बताया गया। तीन दिन तक उन्होंने एके-47 चलानी सीखी। जिसके बाद उन्हें उनकी योग्यता के आधार पर विभाग दिया गया।

ऐसे लौटा भारत
मजीब को रूक्का सीमा पर एक गांव में एक इमारत पर काम करने के दौरान गोली लगी थी। जिसकी वजह से इलाज के बाद भी उसकी नाक से खून निकलता था। इससे तंग आकर आतंकियों ने उसे 2000 डॉलर के साथ तुर्की छोड़ा। जहां से इस्तांबुल पहुंचकर उसने भारतीय दूतावास से संपर्क किया। जिसके बाद वो भारत पहुंचा।

स्थानीय संपर्कों के नाम का किया खुलासा

इराक-सीरिया में सक्रिय आतंकवादी गुट इस्लामिक स्टेट (आईएस) के कथित आतंकी आरिफ मजीद ने पूछताछ में स्थानीय संपर्कों के नाम का खुलासा किया है। इन स्थानीय संपर्कों ने उसे इराक में जारी जंग में हिस्सा लेने के लिए आतंकी गुट में शामिल होने के लिए मदद की थी।

उसने बताया कि वहां पर न तो कोई पवित्र जंग हो रही है और न ही पवित्र कुरान के निर्देशों का पालन हो रहा है। आईएस आतंकी महिलाओं का बलात्कार कर रहे हैं।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अधिकारियों ने इसका भी खुलासा किया कि कैसे उसे आतंकी संगठन ने पूरी तरह से अनदेखा कर दिया था। उसे जंग के मैदान में लड़ने के लिए भेजने की बजाय जंग के मैदान में लड़ रहे लोगों को पानी पहुंचाने और शौचालय साफ करने जैसे काम करने को कहा गया था।

एक अधिकारी ने बताया कि माजिद से रविवार को कई घंटे तक पूछताछ की गई। इसमें उसने स्थानीय संपर्क सूत्रों के नाम बताए जिन्होंने उसे और उसके तीन अन्य साथियों को कट्टरपंथी बनाया था। साथ ही इन लोगों ने ही इनके इराक जाने की व्यवस्था भी की थी।

आरिफ के दावों की जांच की जा रही है और इन स्थानीय संपर्कों का पता लगाने की कोशिश चल रही है। हालांकि अधिकारी ने स्थानीय मददगारों के नामों को उजागर करने से इनकार कर दिया।
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बोला, आईएस नहीं लड़ रहा पवित्र जंग

23 वर्षीय आरिफ से जब पूछा गया कि उसने जंग के मैदान में कितने वक्त तक हिस्सा लिया तो उसने बताया कि उसकी पूरी तरह से अनदेखी की गई। उसे जंग के मैदान में जाने की बजाय सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष कर रहे आतंकियों के लिए पानी ले जाने और शौचालयों की सफाई करने को कहा गया था।

जांचकर्ताओं को उसने बताया कि उसके पर्यवेक्षक के अनुरोध के बावजूद आईएसआईएस कैडर ने उसे जंग में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी। आरिफ ने बताया कि कई हफ्तों के बाद उसे जंग में जाने की अनुमति मिली लेकिन हथियार की ट्रेनिंग के दौरान वह जख्मी हो गया।

आरिफ के अनुसार, घायल होने के बाद भी उसे अस्पताल नहीं ले जाया गया। कई बार की विनती के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन यहां भी उसे अपना इलाज खुद करना पड़ा। कैंपों में उचित इलाज और भोजन की कमी के चलते जख्म की हालत बिगड़ गई।

एके-47, रॉकेट लांचर का मिला परीक्षण
आरिफ ने खुद और कल्याण के तीन अन्य युवकों को एके-47 राइफल और रॉकेट लांचर चलाने का परीक्षण मिलने की बात कबूल की है। उसने कहा कि आईएस भारतीयों को जंग के लिहाज से कमजोर मानते है।
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