नौसेना ने फारस की खाड़ी यानी पर्सियन गल्फ में अपना युद्धपोत आईएनएस मैसूर तैनात कर दिया है। यह फैसला इराक के हिंसाग्रस्त शहरों में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए बनी रणनीतिक योजना के तहत किया गया है।
एक लड़ाकू हेलीकॉप्टर, करीब 600 नौसैनिकों और हथियारों के जखीरे से लैस इस जहाज ने शनिवार को करीब साढ़े तीन बजे दिन में खाड़ी के एक मित्र देश की समुद्री सीमा में लंगर डाल दिया।
उधर, सरकार ने आपात स्थिति के लिए वायु और थल सेना को भी इस संबंध में तैयार रहने को कहा है। गौरतलब है कि इराक के हालात को देखते हुए सरकार ने वहां फंसे भारतीयों को समुद्री रास्ते से निकालने की योजना बनाई है।
मोदी कर रहे निगरानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर पर निगरानी की जा रही इस योजना के तहत चार हजार से अधिक भारतीयों को समुद्री रास्ते से बड़े जहाजों के जरिए निकालने की तैयारी है।
इस समय इराक में कत्लेआम मचा रहे इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) के कब्जे में फंसे 39 भारतीयों और तिरकित के पास एक अस्पताल में फंसी केरल की 46 नर्सों को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इसके अलावा इराक के अलग अलग शहरों से वापस आने के इच्छुक भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाना वहां जटिल होते जा रहे हालात की वजह से सरकार के लिए बड़ी सिरदर्दी भी है।
लिए गए अहम फैसले
शुक्रवार को दिल्ली में कैबिनेट सचिव की अगुवाई में हुई संकट प्रबंधन समिति की उच्चस्तरीय बैठक में जल्द कार्रवाई से संबंधित कई अहम फैसले लिए गए। अरब सागर से ही लगे गल्फ ऑफ इडेन में भारतीय नौसेना का एक लड़ाकू जहाज आईएनएस तरकश पहले से तैनात है।
जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल भी किया जाएगा। गौरतलब है कि अरब सागर उत्तरी छोर पर कुवैत, इराक और ईरान को छूता है। फारस खाड़ी के पूरे ऊपरी हिस्से में ईरान का विस्तार है।
जबकि निचले हिस्से में सऊदी अरब, बहरीन, कतर और यूएई जैसे देश हैं। इस खाड़ी का दक्षिणी छोर ओमान की खाड़ी से होता हुआ अरब सागर से मिलता है।
तैयारी में जुटा भारत
इराक में हालात बिगड़ने के बाद शांत क्षेत्रों से 10 हजार भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत ने तीन कैंप ऑफिस स्थापित किए है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने विचार-विमर्श के लिए रविवार को खाड़ी देशों में तैनात भारतीय राजदूतों की बैठक बुलाई है।
इस बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि इराक में अगवा 39 भारतीय अब भी बंधक हैं, पर उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
उन्होंने बताया कि भारतीय मिशन तिकरित में फंसी 46 नर्सों के संपर्क में है। प्रवक्ता ने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि जिस परिसर में नर्स हैं वहां धमाका हुआ है।