रिटेल में एफडीआई के मुद्दे पर जारी नंबर गेम के सियासी खेल में सरकार बढ़त बनाती दिख है। लोकसभा में मंगलवार को एफडीआई पर महाबहस शुरू हो रही है। विपक्ष के वोटिंग के प्रस्ताव पर सरकार की जंग जीतने की तैयारी पूरी लग रही है, जबकि राज्यसभा में ऑपरेशन नंबर गेम जारी है।
सरकार और विपक्ष के बीच जारी इस महाजंग में सियासी गोटियां सपा और बसपा के पास हैं। दोनों पार्टियों ने सरकार के पक्ष में वोटिंग पर सस्पेंस बनाए रखा है, लेकिन सरकार की ओर झुकाव का भी संकेत दे दिया है। सांप्रदायिक ताकतों की मुखालफत की आड़ में बसपा ने तो राज्यों पर एफडीआई नहीं थोपने की बात कहते हुए सपा ने लोकसभा में सरकार के खेवनहार बनने के संकेत दिए हैं।
एफडीआई को लेकर संकट दूर करने में जुटे कांग्रेस और सरकार के मैनेजरों को सोमवार को बसपा सुप्रीमो मायावती के संकेतों से काफी राहत मिली है। मायावती ने यूपीए सरकार की ओर झुकाव के संकेत दिए हैं। हालांकि संसद के दोनों सदनों में वोटिंग के प्रस्ताव पर उन्होंने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। वैसे पार्टी संकेत दे रही है कि लोकसभा में वह सरकार के समर्थन में वोट नहीं देगी तो वोटिंग से अलग रहकर सरकार की मदद कर सकती है।
उधर, सपा भी अब सीधे तौर पर सरकार के खिलाफ जाने की बात नहीं कर रही है। पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव ने संसद में ही अंतिम निर्णय लेने की बात कही है, लेकिन लोकसभा में सरकार खिलाफ वोटिंग के मसले पर वह कुछ नहीं बोले। लोकसभा में सपा भी वोटिंग से दूरी बना कर सरकार की मदद कर सकती है। गौरतलब है कि लोकसभा में मंगलवार को नियम 184 के तहत रिटेल में एफडीआई पर बहस शुरू होगी और बुधवार को वोटिंग होगी। राज्यसभा में नियम 168 के तहत चर्चा बुधवार को शुरू होगी और वोटिंग बृहस्पतिवार को होगी।
इस महाजंग में विपक्षी दलों की अगुवाई कर रहे भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए यह साबित करना चाहता है कि लोकसभा की वोटिंग में भले ही सरकार जीत जाए मगर उसके पास बहुमत का 272 का आंकड़ा नहीं है। अगर सपा और बसपा सरकार की परोक्ष मदद कर वोटिंग से बाहर रहते हैं तो फिर यूपीए के लिए यह आंकड़ा जुटाना मुश्किल होगा, क्योंकि एनडीए के साथ वामपंथी गठबंधन, अन्नाद्रमुक और तृणमूल कांग्रेस भी सरकार के नंबरों की परीक्षा लेने पर आमादा हैं।
उधर, सरकार लोकसभा में विपक्ष की इस घेरेबंदी से पार पाने को लेकर लगभग आश्वस्त है, लेकिन राज्यसभा में यूपीए का अल्पमत में होना उसके लिए भारी मुसीबत बन सकता है। ऐसे में सपा या बसपा के सरकार के पक्ष में वोटिंग किए बिना यूपीए की नाक बचती नहीं दिख रही। सूत्रों का कहना है कि सपा प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ राज्यसभा में सियासी हंगामा खड़ा करने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि अगर राज्यसभा में सपा ने हंगामा किया तो इसका फायदा सरकार को ही मिलेगा, क्योंकि हंगामे के चलते वोटिंग की कसरत को अंजाम देना मुश्किल होगा और सरकार हंगामे की आड़ में वोटिंग से बच सकती है।