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‘सिंघम’ बने पटना के एसपी, उल्टा पड़ा दांव

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बिहार की राजधानी पटना के सिटी एसपी शिवदीप लांडे रविवार को अपने ‘सिंघम’ स्टाइल के चलते विवादों में घिर गए। लांडे ने रविवार सुबह बिल्कुल फिल्मी स्टाइल में भेष बदलकर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सर्वेश चंद्र को मीडिया की मौजूदगी में रिश्वतखोरी के आरोप में दबोचा लेकिन कुछ घंटे बाद ही सुबूत नहीं मिलने पर छोड़ना पड़ा।
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इससे लांडे की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अपनी कार्यशैली को लेकर विवादों में रहने वाले लांडे से एसएसपी जीतेंद्र राणा ने नाराजगी जताते हुए मामले की पूरी रिपोर्ट मांगी है। राणा ने कहा कि मामले की जांच चल रही है और अगर आरोपी दोषी पाया जाता है तो उसे फिर से हिरासत में लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सिटी एसपी की कार्यशैली को वह सही नहीं मानते। किसी वर्दीधारी पुलिसकर्मी के साथ ऐसा व्यवहार करने से पहले मामले की तह तक जाना चाहिए था। उन्होंने सिटी एसपी को आगे से बिना सोचे समझे कार्रवाई न करने की सलाह भी दी।
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मामले के अनुसार, लांडे ने रविवार को फिल्मी अंदाज में उत्तर प्रदेश अपराध शाखा के इंस्पेक्टर सर्वेश चंद्र को घूस लेते पकड़ा। आरोप है कि मुरादाबाद में पदस्थापित इंस्पेक्टर फर्जी सिम मामले की जांच के नाम एक सिम दुकानदार से 10 हजार रुपये घूस मांग रहे थे। इस सूचना पर लांडे सादे कपड़ों में घटना स्थल पर पहुंचे। आरोपी इंस्पेक्टर ने जैसे ही रिश्वत मांगी लाल गमछे से सिर ढंक कर दुकान पर खड़े लांडे ने उसे धर दबोचा।

हिरासत में लिए गए इंस्पेक्टर को करीब दो घंटे बाद पूछताछ कर छोड़ दिया गया। इसके चलते सवाल खड़े हुए कि पुलिस ने एक वर्दीधारी को सरेआम गलत आरोप में कैसे हिरासत में ले लिया। अगर आरोप सही थे तो फिर किस दबाव में उसे रिहा किया गया। पूरे मामले में पटना के सिटी एसपी की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।

'दुकानदार ने फंसाया'
इंसपेक्टर श्री चंद्र ने बताया कि उन्हें फंसाया गया है। उन्होंने घूस मांगने या धमकी देने जैसी किसी बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि फर्जी सिम की जांच मामले में दुकानदार से पूछताछ की जा रही थी। दुकानदार उनके साथ सहयोग देने और जरूरत पडने पर मुरादाबाद चलने की बात कर रहा था। इसी बीच यह सब हो गया। इधर, दुकानदार एसके सिंह ने बताया कि सिम कारोबार में ऐसी जांच करने के लिए विभिन्न राज्यों की पुलिस आती रहती है, लेकिन इन लोगों का रवैया अलग था।

ये लोग मामले की जांच से ज्यादा मामले को कुछ ले देकर रफा-दफा करने का दबाव बना रहे थे। पंकज के अनुसार इनके साथ दो और पुलिस कर्मी थे, जो इन्हें 10 हजार रुपये देकर मामले को सलटाने की बार बार सलाह दे रहे थे। पंकज ने बताया कि उसने किसी फर्जी आदमी को सिम नहीं बेचा है और न ही उसका कोई आपराधिक रिकार्ड है तो वो घूस क्यों दे, इसीलिए उसने पुलिस को सूचित करने का फैसला किया।


इंस्पेक्टर की इज्जत मटियामेट कर डाली

पटना एसपी सिटी शिवदीप लांडे को सिंघम बनने की सूझी और अपनी हीरोगिरी में उन्होंने एक अच्छे भले इंस्पेक्टर की इज्जत मटियामेट कर डाली। साहब बाकायदा साड़ी लपेटकर गए। इंस्पेक्टर को महज एक दुकानदार की शिकायत पर धर दबोचा। उठाया कुछ इस अंदाज में जैसे आतंकी को उठा ले जा रहे हों।

सच सामने आने पर इंस्पेक्टर सर्वचंद्र छूट तो गए लेकिन एक आईपीएस अफसर की गैरजिम्मेदाराना हरकत ने इंस्पेक्टर की इज्जत को तार-तार कर डाला। इंस्पेक्टर सर्वचंद्र की पटना में हिरासत को लेकर सुबह से शाम तक पुलिस महकमे में खलबली मची रही।

मुरादाबाद एसएसपी लगातार पटना एसएसपी के संपर्क में थे तो लखनऊ से डीजीपी आफिस से भी बार - बार फोन घनघनाते रहे। पूरे मामले पर शासन ने भी रिपोर्ट तलब की।

मुरादाबाद और पटना के पुलिस अफसरों के बीच हुई बातचीत के बाद शाम को जाकर सर्वचंद्र को रिहा किया गया। इससे पहले पूरे पुलिस महकमे में बस इसी घटनाक्रम पर चर्चा होती रही। अफसर लगातार पटना बात करते रहे तो एसओ इंस्पेक्टर की नजरें इस पर टिकी थीं कि अब क्या होगा।
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आईटी एक्ट के मुकदमों की तफ्तीश को गई थी पुलिस

सीओ क्राइम महेश सिंह का कहना है कि कुछ वर्ष पूर्व एक मोबाइल नंबर से कुछ पुलिस इंस्पेक्टरों को कॉल की जा रही थी। कॉल करने वाले ने डीआईजी के नंबर का डुप्लीकेट तैयार कर लिया था। जिसकी वजह से जब वह कॉल करता था तो इंस्पेक्टरों की मोबाइल स्क्रीन पर डीआईजी रेंज का नंबर आता था। इसके बाद कॉल करने वाला किसी एकाउंट में रकम डालने की बात कहता था।

यह फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद तत्कालीन इंस्पेक्टर सिविल लाइंस गमलेश्वर बिल्टोरिया ने एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके अलावा कई ऐसे मामले थे जिनमें कॉल करके लोगों से उनके एटीएम पिन पूछे गए और फिर उनके बैंक एकाउंट से रकम उड़ा ली गईं। सीओ के मुताबिक सर्विलांस में पता चला था कि इनमें से कुछ नंबर बिहार और कुछ पटना में चल रहे हैं। पटना की एक दुकान से सिम खरीदा गया था इसलिए दुकानदार से पूछताछ की गई।

दुकानदार से पूछा गया कि उसने जिन लोगों को सिम उपलब्ध कराई हैं उनका नाम पता बताए। उसने सुबह आने को कहा तो इंस्पेक्टर सुबह दोबारा गए। इस बीच उसने एक चैनल के पत्रकार और पटना के एसपी सिटी के साथ मिलकर ये स्क्रिप्ट लिख डाली। सीओ का कहना है कि मुरादाबाद पुलिस के मूवमेंट की जानकारी पटना पुलिस को दी गई थी। इंस्पेक्टर की छवि साफ है। उधर, पुलिस महकमे में भी इंस्पेक्टर सर्वचंद्र की छवि साफ है। उनका एक बेटा आर्मी में कैप्टन भी है।

मुरादाबाद एसएसपी लव कुमार ने कहा कि जिस तरीके से एसपी सिटी पटना ने इंस्पेक्टर को पकड़ा वो गलत था। हम इस बात से इंकार नहीं करते कि इंस्पेक्टर ने रिश्वत नहीं मांगी होगी। हो सकता मांगी हो, लेकिन यदि ऐसा था तो उसे प्रोपर तरीके से ट्रैप किया जाना चाहिए था। पटना पुलिस के पास कोई साक्ष्य नहीं है। इंस्पेक्टर से कोई रिश्वत भी बरामद नहीं की गई है। इंस्पेक्टर को स्टेटमेंट रिकार्ड करके रिलीज कर दिया गया है। यदि पटना पुलिस कोई जांच रिपोर्ट भेजेगी तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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