रोजमर्रा उपयोग की खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों से त्रस्त जनता को जल्द राहत मिलने के आसार दिख रहे हैं। नरेंद्र मोदी के महंगाई से निजात दिलाने के वादे को हकीकत में बदलने के लिए कसरत शुरू हो गई है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने इसकी पहल करते हुए खाद्य वस्तुओं की कीमतों मे कमी के उपायों पर अमल की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी संदर्भ में सोमवार को देर शाम तक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बैठकों का सिलसिला चलता रहा।
दरअसल पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने महंगाई पर लगाम लगाने के उपाय तलाशने के लिए अप्रैल 2010 मे तीन कमेटियों का गठन किया था। इन कमेटियों को अपनी रिपोर्ट दो महीने में प्रधानमंत्री को सौंपनी थी।
मोदी सरकार लगाएगी लगाम
इन कमेटियों में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को उपभोक्ता मामले, हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कृषि उत्पादन और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण की कमेटी का अध्यक्ष बनाया था।
नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने लगभग ग्यारह महीने बाद अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी थी। इसमें महंगाई को काबू मे करने के लिए 62 व्यवहारिक बिंदु और लगभग 20 तात्कालिक कदम उठाने की सिफारिश की गई थी। इसमें वायदा बाजार को बंद किए जाने की सिफारिश प्रमुख थी।
हालांकि मनमोहन सिंह ने मोदी की अध्यक्षता वाली समिति के कामकाज और उसकी सिफारिशों की तारीफ की थी। लेकिन इन सिफारिशों पर अमल नहीं किया गया। अब जब मोदी के नेतृत्व में केंद्र की सरकार बनने जा रही है।
चला लंबी बैठकों का दौर
तब उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों को भी उस रिपोर्ट की याद आई है। इसी के चलते मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकों का सिलसिला चलता रहा।
बैठक का एजेंडा खाद्य वस्तुओं खासकर रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में कमी लाने के उपाय ढूंढकर उन पर अमल करना आदि था।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भावी प्रधानमंत्री की पहली प्राथमिकता खाद्य महंगाई पर नियंत्रण लगाना है ताकि अच्छे दिन आने वाले हैं के नारे को चरितार्थ किया जा सके।