अपनी ही बेटी शीना की हत्या के आरोप में पुलिस लॉक अप में कैद आईएनएक्स मीडिया की पूर्व सीईओ इंद्राणी मुखर्जी और उसके पूर्व पति संजीव मुखर्जी आपस में ही भिड़ गए।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि जब संजीव खन्ना और उससे पूछताछ की गई तब वह उत्तेजित हो गई। उसने कहा कि शीना की हत्या मैंने नही संजीव ने की थी। इंद्राणी किसी भी गंभीर सवाल पर चीखने लगती है। इससे पहले मिखाइल से आमना-सामना होने पर भी वह अपना आपा खो बैठी थी।
शनिवार की रात पूछताछ के दौरान इंद्राणी ने बताया कि वह शीना से नफरत जरूर करती थी लेकिन मैंने उसे नहीं मारा। इंद्राणी ने कहा कि शीना उसे पैसे के पीछे भागने वाली स्वार्थी महिला कहकर मेरे अतीत के दर्द की याद दिलाती थी। शीना उसे धमकी देती थी कि मेरा सीक्रेट मेरे पति पीटर मुखर्जी को बता देगी।
इंद्राणी के इस बयान से यह साफ हो गया कि उसके दोनों बच्चे शीना और मिखाइल से रिश्ते तनावपूर्ण थे। वहीं, उसके दूसरे पति संजीव खन्ना ने इस अपराध में शामिल होना कबूल करते हुए कहा कि इंद्राणी ने ही उसे आर्थिक मदद का वादा कर इस अपराध में शामिल किया था।
बताया जा रहा है कि शीना को मारने से पहले इंद्राणी उसे धीमा जहर दे रही थी। खुद शीना ने अपनी एक सहेली से यह आशंका जताई थी। इसी के चलते वह बार-बार बीमार पड़ जाती थी। मेडिकल रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई थी।
किस नेता ने रुकवाई थी जांच, जल्द होगा खुलासा
शीना बोरा हत्याकांड में किस नेता ने जांच रुकवाई थी इसका जल्द ही खुलासा होगा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि रायगढ़ पुलिस की लापरवाही की जांच में अब नेता की भूमिका पर भी जांच होगी।
बता दें कि महाराष्ट्र के डीजीपी संजीव दयाल ने शनिवार को रायगढ़ पुलिस की लापरवाही की जांच का आदेश दिया है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि सन 2012 में सूबे में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार थी।
गृहविभाग एनसीपी के पास था इसलिए शक की सूई किसी एनसीपी नेता की ओर है। बताया जाता है कि इसी नेता के कहने पर पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (एडीआर) और एफआईआर दर्ज करने के बजाय सिर्फ डायरी मेंटेन कर अपना काम पूरा कर लिया था। इसलिए शीना बोरा की हत्या का मामला तीन साल तक उजागर नहीं हो सका।