कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रिंट कराई गई एमए इतिहास की पाठ्य सामग्री में पिछले छह साल से भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को 1986 तक जीवित दिखाया जा रहा है। गलती सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। निदेशालय की यह पाठ्य सामग्री संबंधित विषय के बजाय दूसरे विषय के विशेषज्ञ से चेक कराई गई है। इन खामियों की शिकायत करने पर दूरवर्ती विभाग इस साल से एमए का सिलेबस बदल रहा है। हरियाणा की शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने भी इसे गंभीर गलती माना है।
एमए इतिहास प्रथम वर्ष के नोट्स में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को 1986 में जिंदा दिखाया गया है। हालांकि उनकी मृत्यु 31 अक्तूबर, 1984 को हुई थी। यह गलती 20वीं सदी का इतिहास विषय पर ‘प्रगति का युग : रंगभेद महिलावाद’ चैप्टर में की गई है। इन नोट्स को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के आधुनिक इतिहास के लेक्चरर डॉ. एसके चहल ने लिखा है और प्रोफेसर आरएस सांगवान द्वारा चेक किया गया है। सांगवान मध्यकालीन इतिहास के विशेषज्ञ हैं।
इस गलती का पता चलने पर 30 मार्च, 2012 यूनिवर्सिटी कोर्ट में कुलपति डॉ. डीडीएस संधू के सामने जब यह मामला उठाया गया, तो उन्होंने जांच के आदेश दिए। दूरवर्ती शिक्षा के निदेशक डॉ. रजनीश शर्मा ने बताया कि इतिहास विभाग के डॉ. चतरसिंह को इसकी जांच करने के आदेश दिए गए हैं। डॉ. चतरसिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि गलती लेक्चरर द्वारा की गई है। प्रिंटिंग में कोई गलती नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि जब कोई लेक्चरर नोट्स तैयार करता है तो उसे सीडी बनाकर साफ्ट कापी विभाग को देनी होती है, जांच में पाया गया कि गलती सीडी में ही की गई थी और यह सीडी लेक्चरर ने खुद तैयार करके दूरवर्ती विभाग को दी थी। जांच पूरी हो जाने के बाद न तो दूरवर्ती विभाग ने लेक्चरर के खिलाफ कोई कार्रवाई की और न ही कुलपति महोदय ने कोई आदेश दिए।
मामूली सी ही गलती है
दूरवर्ती विभाग के निदेशक डॉ. आरके शर्मा ने कहा कि यह तो मामूली सी गलती है, जो इस बार पूरा सिलेबस बदलकर ठीक कर दी गई है। नोट्स को किसने चेक किया, ये सब कोर्स कोआर्डिनेटर का दायित्व है। इस साल जो विद्यार्थी एमए करेंगे, वे नए सिलेबस के अनुसार ही परीक्षाएं देंगे। लेकिन पिछले वर्ष कंपार्टमेंट आने वालों को पुराने सिलेबस के अनुसार ही परीक्षा देनी होगी।
ऐतिहासिक तथ्यों को नहीं बदल सकते
केयू कुलपति डीडीएस संधू ने कहा कि इस तरह ऐतिहासिक तथ्यों को हम नहीं बदल सकते, यह कोई छोटी गलती नहीं है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा गलती सुधार करते हुए एमए इतिहास का सिलेबस बदल दिया गया है।
सात माह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
इतनी बड़ी गलती हो जाने के बाद शिकायत के 7 महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय और कुलपति द्वारा इसके लिए जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।
मामले की जांच होगी
शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने कहा कि इस तरह की गलती बिल्कुल सही नहीं है। तुरंत प्रभाव से मैं इसकी जांच करवाऊंगी। इस तरह ऐतिहासिक तथ्यों को इतने बड़े स्तर पर हम गलत नहीं लिख सकते, जो भी इसमें दोषी होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लिखित शिकायत की थी
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कोर्ट के इलेक्टिड मेंबर अतुल यादव ने बताया कि उन्होंने 30 मार्च 2012 को केयू की कोर्ट मीटिंग में कुलपति को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन अभी तक उनके पास इस विषय पर यूनिवर्सिटी द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गई है। नियम के अनुसार शिकायतकर्ता को संबधित विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी देना जरूरी है।