उत्तर प्रदेश के लगभग सात हजार प्राथमिक विद्यालयों में ताला लगा है जबकि 15 हजार से अधिक ऐसे हैं जहां एक ही शिक्षक है। ऐसा भी नहीं कि दो-चार महीने से यह हालत हो। पूरे चार साल से प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। दो लाख से अधिक पद खाली हैं। देश के बाकी हिस्से में दो से तीन दफे शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का आयोजन हो चुका, कई प्रदेशों में इसके आधार पर नियुक्तियां भी हो गईं लेकिन उत्तर प्रदेश में अब तक कुछ साफ नहीं है।
केवल प्राथमिक ही नहीं, माध्यमिक स्कूलों में भी चयन का हाल बेहद खराब है। स्कूलों के खुलने के तीन महीने बाद भी अधिकांश विद्यालयों में पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। तमाम विद्यालयों में साइंस, मैथ्स, अंग्रेजी के शिक्षक नहीं हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने छह माह में भर्ती का आदेश दिया है तो अभिभावकों को उम्मीद जगी है कि उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकती है।
हालांकि प्रदेश में जो हालात हैं, सरकार यदि तत्काल पदों की घोषणा कर दे तो भी छह महीने में चयन पूरा हो पाना मुश्किल लगता है। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली हैं। शिक्षकों की भर्ती के लिए पहले इन पदों पर तैनाती करनी होगी। उसके बाद विद्यालयों से रिक्तियां मांगी जाएंगी, उनके अनुरूप विज्ञापन होगा, परीक्षा होगी, साक्षात्कार होगा उसके बाद चयन संभव है, जो छह माह में पूरा होना कठिन है।
टीईटी का आवेदन इसी माह
प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के चयन को लेकर सरकार पूरी तैयारी के दावे कर रही है। तैयारी है कि आठ अक्तूबर को विज्ञापन जारी किया जाएगा लेकिन इसे लेकर इतने विवाद हैं कि जब तक चयन हो न जाए, कुछ कहना मुश्किल है। हाल यह है कि अकेले इलाहाबाद में ही 335 विद्यालयों में ताले लगे हैं जबकि 1074 विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। सरकार ने भर्ती की जो प्रक्रिया अपनाई है, उसमें छह माह की तो केवल ट्रेनिंग दी जानी है, ऐसे में छह माह की अवधि में चयन कैसे संभव है। जाहिर है सरकार को नीति में बदलाव करना होगा।
एक नजर
-1,04,623 प्राथमिक विद्यालय हैं राज्य में
-45,527 जूनियर हाई स्कूल हैं प्रदेश में
-5,33,480 प्राथमिक शिक्षकों के पद
-2,68,960 जूनियर हाईस्कूल शिक्षक होने चाहिए
माध्यमिक में 25 हजार पद खाली
सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के चयन के लिए स्थापित माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में अध्यक्ष और सदस्यों के अभाव में पूरा काम ठप पड़ा है। टीजीटी-पीजीटी के चयन में अनियमितता के कारण सरकार ने भी चयन पर रोक लगा रखी है। चयन बोर्ड के काम पर रोक लगने से पिछले सत्र और वर्तमान सत्र में शिक्षकों के रिक्त पड़े 25 हजार पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया ठप है। इसका नतीजा है कि ज्यादातर विद्यालयों में विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषयों के शिक्षक नहीं है। इन विषयों में शिक्षकों की कमी से प्रदेश के नामी-गिरामी स्कूलों में भी बच्चे प्रवेश लेने से बच रहे हैं।
जीआईसी में वर्ष 2000 के बाद नहीं भरे गए पद
प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों (जीआईसी) में वर्ष 2000 के बाद भर्ती और पदोन्नति नहीं होने से शिक्षण कार्य पूरी तरह से ठप है। प्रदेश के 560 जीआईसी बिना प्रधानाचार्य के चल रहे हैं। संयुक्त शिक्षा निदेशकों की ओर से इस समय पदों की घोषणा की गई है। घोषित पदों में प्रदेश में खाली पदों का 10 फीसदी भी विज्ञापित नहीं हुआ है। प्रदेश में इस समय 1021 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को उच्चीकृत करके राजकीय हाईस्कूल में तब्दील किया जा चुका है। इन विद्यालयों में भी शिक्षकों और प्रधानाचार्य के 10 हजार से अधिक पद खाली हैं।
टायलेट के अभाव में लड़कियां छोड़ रहीं स्कूल
प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लड़कियों का पंजीकरण बढ़ा है लेकिन बड़ी संख्या में विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें टायलेट की सुविधा नहीं होने से 13 वर्ष के बाद की 50 फीसदी से अधिक लड़कियां प्रवेश के बाद स्कूल छोड़ रही हैं। यह आंकड़ा यूनीसेफ की रिपोर्ट पर आधारित है। यूनीसेफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि विद्यालयों में साफ-सफाई नहीं होने से लड़कियां बीमारी के डर से शौचालय के प्रयोग से बचती हैं।