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‘नेशनल हेराल्ड’ की तर्ज पर कांग्रेस ने बीजेपी को घेरा

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नेशनल हेराल्ड मामले में घिरी कांग्रेस ने अब उसी तर्ज पर एक मामले में भारतीय जनता पार्टी को लपेट लिया है। महाराष्ट्र कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुंबई में प्रकाशित होने वाले अखबार ‘मुंबई तरुण भारत’ को भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 70 लाख रुपये का ऋण दिया है।
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कांग्रेस ने इस मामले में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के शिक्षामंत्री विनोद तावड़े को कटघरे में खड़ा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दोनो मंत्रियों से इस्तीफा मांगा है। वहीं, बीजेपी ने अपने मंत्रियों का बचाव करते हुए इसे नेशनल हेराल्ड केस से ध्यान हटाने की कोशिश करार दिया है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल और मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने शुक्रवार को संयुक्त प्रेसवार्ता में कहा कि मुंबई तरुण भारत चलाने वाली कंपनी श्री मल्टीमीडिया विजन लिमिटेड में भाजपा ने 15 साल के लिए 25 लाख रुपए का ट्रेड एडवांस किया है, लेकिन नियमानुसार 12 से 18 माह की काल अवधि के लिए ही ऐसा किया जा सकता है। 15 साल के लिए नहीं, इसमें बड़ा घोटाला है। इस कंपनी में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और विनोद तावड़े निदेशक है।
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कंपनी की बैलेंस सीट पर हस्ताक्षर क्यों किए?

निरुपम का कहना है कि मानद संचालक होने के बावजूद तावड़े ने कंपनी की बैलेंस सीट पर हस्ताक्षर क्यों किए? नियमानुसार मंत्री बनने के 60 दिनों के बाद कंपनी के भागीदार और निदेशक पदों से इस्तीफा देने का नियम है और चुनाव के घोषणापत्र में इसकी जानकारी देना आवश्यक है, लेकिन तावड़े ने ऐसा नहीं किया।

मंत्री रहते हुए कोई भी लाभ कमाने वाली कंपनी के निदेशक पद पर नहीं रह सकता। यह अपराध है। लेकिन तावड़े श्री मल्टीमीडिया विजन लिमिटेड कंपनी सहित छह अन्य कंपनियों के निदेशक पद पर कार्यरत हैं। निरुपम ने आरोप लगाया कि गडकरी के पास छह डीन नंबर और तावड़े के पास तीन डीन नंबर है।

यह कंपनी अधिनियम के तहत अपराध है। कानूनन पेनकार्ड की तरह देश में एक व्यक्ति के पास एक ही डीन नंबर होना चाहिए।
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'विरोधियों केआरोप सफेद झूठ'

शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा कि सभी आरोप सफेद झूठ और गलत जानकारी पर आधारित है। मेरे नाम पर तीन डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (डीआईएन) का दावा किया जा रहा है, यह हास्यास्पद है। नियमानुसार मेरे पास केवल एक ही डीआईएन नंबर है। इसकी जानकारी मिनिस्ट्री ऑफ कंपनी अफेयर्स की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

विखे पाटिल ने जिन तीन डीआईएन नंबरों की जानकारी पत्रकारों को दी है, उसमें पहला डीआईएन नंबर 01427×75 रद्द/ अमान्य हो गया है। दूसरा नंबर 0261802× खत्म हो गया है, जबकि तीसरा नंबर 01720284 मेरे नाम पर है। उन्होंने कहा कि मंत्री पद स्वीकार करने के बाद कंपनी के संचालक मंडल से इस्तीफा देने का कोई भी कानून नहीं है।
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