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'इनकी' दौलत से दो बार मिट सकती है गरीबी

Sun, 02 Nov 2014 08:08 AM IST
संतोष कुमार/अमर उजाला, दिल्ली
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भारत में अरबपतियों के पास इतना धन है, जिससे देश की गरीबी दो बार मिटाई जा सकती है। केंद्र सरकार अगर बढ़ती आर्थिक असमानता को रोक ले तो पांच साल के भीतर हाशिए पर पड़े नौ करोड़ देशवासी गरीब नहीं रह जाएंगे।
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जबकि असमानता में 36 फीसदी कमी आने से देश की गरीबी खत्म हो जाएगी। इसका खुलासा ऑक्सफैम की ‘फासले मिटा दें: असमानता खत्म करने का समय’ नामक वैश्विक रिपोर्ट में हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान, नोबेल पुरस्कार विजेता जोसेफ स्टिग्लिज, ग्राचा माशेल समर्थित रिपोर्ट शुक्रवार को स्पेनिश कल्चर सेंटर में जारी की गई। रिपोर्ट बताती है कि अमीर-गरीब के बीच खाई बढ़ती जा रही है।
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90 के दशक में देश में सिर्फ दो अरबपति थे। फिलहाल इनकी संख्या 65 है। वहीं, वैश्विक मंदी के बावजूद दुनिया में अरबपतियों की संख्या दोगुनी हो गई।

दूसरी तरफ दुनिया के सिर्फ 85 लोगों के पास इतनी दौलत है, जितनी पूरी दुनिया की सबसे गरीब आधी आबादी के पास है।

नौ करोड़ लोगों की मिट सकती है गरीबी

खास बात यह कि दुनिया के अरबपतियों की संपत्ति पर सिर्फ 1.5 फीसदी का कर लगाने से सबसे गरीब 49 देशों की स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश लायक रकम मिल जाती। इससे 2.3 करोड़ लोगों की जान बच सकती थी।

रिपोर्र्ट सिफारिश करती है कि इच्छा शक्ति से दुनिया की सरकारें असमानता दूर कर सकती हैं। इसके लिए बड़े कारोबारी घरानों पर उचित टैक्स लगाना होगा। इससे सार्वजनिक सेवाओं में निवेश की रकम मिलेगी।

ऑक्सफैम की सीईओ निशा अग्रवाल के मुताबिक, सरकारों के लिए यह बेहद आसान है। मसलन, अगर चोटी के 65 कुबेरों पर महज 1.5 फीसदी संपत्ति कर लगाया जाए तो नौ करोड़ लोग गरीबी से मुक्त हो सकते हैं।
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संपत्ति को लेकर वैश्विक आंकड़े-

- फ्रांस की जीडीपी से दोगुनी है दुनिया के अरबपतियों की दौलत
- सबसे गरीब आबादी के बराबर है दुनिया के 85 अमीरों के पास दौलत।
- टैक्स हैवेन देशों में अमीरों की दौलत जमा होने से 156 अरब डॉलर के राजस्व का हो रहा घाटा।
- समान काम करने वाली महिलाओं को तीस फीसदी कम वेतन मिलता है।

- फॉर्च्यून-500 की सूची में शामिल कंपनियों में से सिर्फ 23 महिलाएं चीफ एग्जीक्यूटिव, जबकि तीन सबसे अमीर लोगों में सिर्फ तीन महिलाएं।
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