दुष्कर्म पीड़िताओं की तकलीफ उस भयावह कृत्य का शिकार बनने के दौरान ही खत्म नहीं होती, बल्कि इसे हमारा समाज और मीडिया समय-समय पर जिंदा करता रहता है।
भारतीय मीडिया जब दुष्कर्म के मामलों की खबर चलाता है, तो इसमें अपराध को अंजाम देने वाले को दोषी ठहराने की बजाय पीड़िता को नसीहत देने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।
उस पर हमारे राजनेता अपने विवादित बयानों से पीड़िताओं को ही दुष्कर्म का दोषी बताना शुरू कर देते हैं।