पाकिस्तान में चरमपंथियों की गोलियों का सामना करने के बावजूद अपने लक्ष्य पर अडिग मलाला युसुफ़जई को लिखे एक पत्र में तालिबान ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जिक्र किया है।
करीब 2000 शब्दों के अपने खत में तालिबान के कमांडर ने लिखा है, ‘मैं चाहता हूं कि जो दया तुमने मुहम्मद साहब से सीखी है, काश वही पाकिस्तानी सेना भी सीखती और बेगुनाह मुसलमानों का खून बहाना बंद करती...। जो दया तुमने प्रभु ईसा मसीह से सीखी है, वही दया अमेरिका और नाटो को भी सीखनी चाहिए।
इसमें आगे लिखा है, 'मैं भगवान बुद्ध के अनुयायियों से भी यही उम्मीद करता हूं। साथ ही भारतीय सेना से भी आशा करता हूं कि वह गांधी जी से भी यही सीखेगी।’
वायुसेना की नौकरी छोड़कर तालिबान का दामन थामने वाले स्वयंभू कमांडर अदनान राशिद ने मलाला यूसुफजई को खत लिखा था।
इसके अलावा खत में तालिबान ने मलाला से पाकिस्तान लौटकर अपनी ‘कलम’ का इस्तेमाल इस्लाम के लिए करने को कहा था।
साल 2003 में पाकिस्तान के तत्कालीन सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की हत्या की कोशिश के आरोप में अदनान को फांसी की सजा सुनाई गई थी।
अपने खत में अदनान ने मलाला पर तालिबान की ओर से किए गए हमले का भी बचाव किया। बकौल अदनान, यह हमला बच्चों की शिक्षा की पैरवी करने के लिए नहीं किया गया। बल्कि मलाला अपनी कलम से उन लोगों का साथ दे रही थी, जो लोग अपना एजेंडा साधने के लिए निर्दोष लोगों का खून बहा रहे हैं।
बीते दिनों संयुक्त राष्ट्र में दिए अपने भाषण में भी मलाला ने बापू का जिक्र किया था। पाक किशोरी ने खुद का महात्मा गांधी की अहिंसा का सच्चा अनुयायी बताया था।