केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि वह वैश्विक एजेंसियों से अपने विश्वविद्यालयों की रैंकिंग नहीं कराएगी। सरकार के इस निर्णय को विश्व के शीर्ष संस्थानों में भारतीय संस्थानों के नहीं होने से जोड़कर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस फैसले के बाद सरकार आलोचना से बच जाएगी और कोई यह आरोप नहीं लगा पाएगा कि भारतीय विश्वविद्यालय दुनिया के अंडर-50 या अंडर-100 संस्थानों में शामिल नहीं हैं।
मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने सोमवार को लोकसभा को बताया कि वैश्विक एजेंसियों की ओर से जारी होने वाली रैंकिंग का मुख्य आधार शोध और विदेशी फैकल्टी को शामिल होना होता है। संस्थाओं को रैंक देते समय यह एजेंसियां क्षेत्रीय भाषाओं में किए जा रहे शोध को शामिल नहीं करतीं।