बैंक खातों की गोपनीयता को खत्म करने को लेकर स्विट्जरलैंड इन दिनों जबरदस्त दबाव में है। भारत, अमेरिका समेत अनेक देश अपने नागरिकों के स्विस बैंकों में खाते की प्रमाणिक जानकारी की मांग कर रहे हैं।
भारतीय जांचकर्ताओं ने सीक्रेट वित्तीय जानकारी हासिल करने के लिए स्विस सरकार से सबसे अधिक अनुरोध किया। स्विस बैंकों की गोपनीयता खत्म होने से मनी लांड्रिंग और टैक्स चोरी के मामलों की जांच में तेजी आ सकेगी।
क्लासीफाइड टैक्स जानकारी हासिल करने के लिए भारत के वैश्विक अनुरोध में 59 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। यह अनुरोध हाईप्रोफाइल टैक्स चोरी और घोटाले से संबंधित मामलों में किए गए हैं।
2012-13 वित्तीय वर्ष के दौरान दुनिया भर से 646 अनुरोध किए गए जबकि 2011-12 में यह आंकड़ा मात्र 386 था। स्विट्जरलैंड के साथ दोहरा कराधान से बचाव समझौता (डीटीएए) के तहत भारत ने सीक्रेट फाइनेंशियल जानकारी हासिल करने के लिए सबसे अधिक 232 अनुरोध पत्र भेजे हैं।
2012-13 के दौरान भारत ने इसी तरह के 145 पत्र मॉरिशस को भेजे। मॉरिशस के रास्ते देश में बड़ी मात्रा में निवेश किया जाता है। देश में चल रहे कई हाई प्रोफाइल और आपराधिक मामलों की जांच में यह पता चला है कि इसमें शामिल आरोपियों का काला धन स्विस बैंकों में जमा है।
2012-13 वित्तीय वर्ष में स्विट्जरलैंड और मॉरिशस के अलावा भारत ने सीक्रेट टैक्स और वित्त संबंधी जानकारी हासिल करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (38), ब्रिटेन (26), अमेरिका (61), साइप्रस (16), डेनमार्क (11) और सिंगापुर (19) अनुरोध पत्र भेजे।