भारत सरकार ने आखिरकार पाकिस्तान पर सरबजीत की रिहाई के लिए नए सिरे से दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
भारत ने बीते शुक्रवार को लाहौर (पाकिस्तान) की कोट लखपत जेल में जानलेवा हमले के बाद जीवन और मौत के बीच झूल रहे सरबजीत को रिहा करने की मांग पाकिस्तान से की है।
इसके साथ ही बेहतर इलाज के लिए मानवीय आधार पर उसे किसी तीसरे देश में भेजने की अपील भी की है। सरबजीत की रिहाई के लिए उसके परिजनों और जनदबाव के बाद सरकार सक्रिय हुई है।
इस बीच सरबजीत का परिवार चार दिन में ही बुधवार को पाकिस्तान से लौट आया। उसने पाकिस्तानी डॉक्टरों पर अविश्वास जाहिर करते हुए केंद्र सरकार से तत्काल सरबजीत का भारत या तीसरे देश में इलाज की मांग की है।
परिजनों ने सरकार पर किसी भी तरह की मदद न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें मीडिया से बातचीत न करने की भी सलाह दी गई थी।
सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने कसम खाई कि वह सरबजीत की भारत वापसी या किसी तीसरे देश में इलाज के लिए भेजे जाने तक अनाज नहीं खाएंगी और सिर्फ लिक्विड पर रहेंगी।
उन्होंने एक भारती कैदी को पाकिस्तान से न छुड़ा पाने के लिए प्रधानमंत्री से इस्तीफे की भी मांग की।
परिजनों के आक्रामक तेवर और तेज मुहिम से बनते जनदबाव के बाद भारत ने पाकिस्तान अनुरोध किया कि वह कानूनी पेचिदगियों को परे रख कर मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाए।
इस बीच पाकिस्तान ने भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को सरबजीत के पास प्रतिदिन जाने देने की इजाजत दे दी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन के अनुसार पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायुक्त शरद सभरवाल ने बुधवार को पाकिस्तान के विदेश सचिव से मुलाकात की।
मुलाकात में सबरवाल ने अपील की कि किसी तीसरे देश में इलाज के लिए भेजे जाने के मामले में पाकिस्तान मानवीय दृष्टिकोण अपनाए और कानूनी पेचिदगियों को परे रखे।
उधर सरकार ने कहा है कि वह लगातार पाक के संपर्क में है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार ने परिजनों को मीडिया से बातचीत न करने की कोई सलाह नहीं दी थी।
उन्होंने कहा कि सरकार सरबजीत की रिहाई के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
तालिबानियों से खतरा
दलबीर कौर ने कहा कि हमें लगा कि हम पाकिस्तान में सुरक्षित नहीं हैं, इसलिए वापस भारत आना ही बेहतर समझा। वहां सुरक्षा अधिकारियों ने भी कहा था कि हमारी जान को भी तालिबानियों से खतरा है।
पति की रक्षा करें प्रधानमंत्री
मेरे पति अभी जिंदा है। मैं प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से हाथ जोड़ कर अपील करती हूं कि वह मेरे पति की जान की रक्षा करें।
-सुखप्रीत कौर, पत्नी
पाकिस्तान में डॉक्टरों पर भरोसा नहीं
- हमें पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारियों और डॉक्टरों ने सिर्फ पांच बार ही मेरे पिता से मिलने दिया है। मेरे पिता को नहीं पता चला है कि हम उनसे मिलने आए हैं। हमें पाकिस्तान के डॉक्टरों और उनकी ओर से उनके पिता के किए जा रहे इलाज पर विश्वास नहीं है।
-स्वप्नदीप, पुत्री
हमले की जांच में नहीं पाक की दिलचस्पी
सरबजीत सिंह पर जेल में जानलेवा हमले के बाद जेल अधिकारियों पर कार्रवाई की खबरें झूठी थीं। सच्चाई यह है कि पाकिस्तान ने अभी तक इन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
बीते शुक्रवार को सरबजीत पर हमले के अगले दिन कहा गया था कि जेल के सहायक सुप्रिंटेंडेंट समेत तीन से चार जेल अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
जबकि हकीकत में पंजाब प्रांत की सरकार ने जेल के सात अधिकारियों के केवल नोटिस जारी किए कि सरबजीत को सुरक्षा न दे पाने के कारण क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
खास बात यह भी है कि डीजीपी (जेल) मलिक मुबशीर ने भी अपनी रिपोर्ट में किसी अधिकारी को हादसे के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
पंजाब प्रांत की सरकार भी इस मुद्दे पर खामोश है। उसने सरबजीत पर हमले की निंदा करना भी जरूरी नहीं समझा है।
सूत्रों का कहना है कि प्रांतीय सरकार सरबजीत पर हमले के मामले में किसी गंभीर और गहन जांच कराने से बच रही है।
उसने जिन्ना अस्पताल और कोट लखपत जेल के अधिकारियों पर मीडिया से बात करने की भी पाबंदी लगा दी है।
सरबजीत को लाने के लिए दखल दें पीएम: बादल
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सरबजीत सिंह के बेहतर इलाज के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
उन्होंने कहा है कि केंद्र को ऐसे कूटनीतिक मार्ग अपनाने चाहिए जिससे पाकिस्तान पर दबाव बने। बादल ने कहा कि सरबजीत को भारत लाकर बेहतर इलाज कराने की कोशिशें केंद्र को करनी चाहिए।
यह उसकी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सरबजीत के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि इस मामले में राज्य के लिए करने को कुछ नहीं है। लेकिन वह केंद्र पर जरूर दबाव बना सकते हैं।
यही नहीं उन्होंने पाक सरकार से भी अपील की कि मानवीय आधार पर सरबजीत को बेहतर इलाज के लिए किसी दूसरे देश भेजना चाहिए।