मल्टी ब्रांड रिटेल सेक्टर में सरकार की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हरी झंडी दिखा दी है।
पीठ ने कहा कि बिचौलिये अर्थव्यवस्था में दीमक लगा रहे हैं। अगर उनकी भूमिका को समाप्त करके उपभोक्ता को राजा बनाने की कोशिश की जा रही है तो उसका विरोध जायज नहीं लगता।
सरकार ने अगर इस दिशा में कोई नीतिगत फैसला लिया है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।
जस्टिस आरएम लोढ़ा, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ की पीठ ने केंद्र की इस नीति के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह नीति किसी भी सूरत में असंवैधानिक नहीं है।
अदालत नीतिगत फैसलों में तभी हस्तक्षेप करती है जब यह वैधानिक प्रावधानों के खिलाफ हो या इसमें अधिकारों का दुरुपयोग किया गया हो।
पीठ ने कहा कि नीति किसान और खुदरा उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है। इसका वास्तविक मकसद बिचौलिये की कमाई खत्म करना है।
राज्य सरकार नीति को लागू करने के लिए बाध्य नहीं है। खुदरा बाजार में 51 प्रतिशत एफडीआई लागू करना या न करना राज्य सरकारों पर निर्भर करता है।