देश के अंदर जहां भ्रष्टाचार के नित प्रतिदिन नए मामले सामने आ रहे हैं वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इससे निपटने के मामले में भारत की छवि में बहुत ज्यादा सुधार नहीं आया है।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा बुधवार को जारी की गई भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (सीपीआई) में 176 देशों में से भारत का 94वां स्थान है। भारत की स्थिति अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश से बेहतर है लेकिन चीन, भूटान और श्रीलंका से खराब है।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की भारतीय शाखा की कार्यकारी निदेशक अनुपमा झा ने सूची जारी करते हुए कहा कि भारत पिछले वर्ष 183 देशों में 95वें स्थान पर रहा था। उन्होंने कहा कि उनके संगठन ने इस वर्ष सर्वेक्षण का तरीका बदला है इसलिए पिछले वर्ष के आंकड़ों की इस वर्ष से तुलना नहीं की जा सकती।
सूची में भारत 36 अंक के साथ 94वें स्थान पर है। वहीं, नेपाल और पाकिस्तान 27 अंक के साथ 139वें स्थान तथा बांग्लादेश 26 अंक के साथ 144वें स्थान पर रहा। अफगानिस्तान, उत्तर कोरिया और सोमालिया 100 में से आठ अंक लेकर सबसे निचले पायदान पर रहे और उन्हें सबसे भ्रष्ट देशों में गिना जा सकता है।
गत वर्षों की तरह डेनमार्क, फिनलैंड और न्यूजीलैंड 90 अंक लेकर इस सूची में सबसे ऊपर रहे और उन्हें सबसे कम भ्रष्ट देश के रूप में गिना जा सकता है। इसके बाद स्वीडन 88 और सिंगापुर 87 का नंबर आता है।
पिछले वर्षों में भारत की स्थिति
2007 में पहली बार 180 देशों में से भारत को 72वां स्थान मिला था। तब से लगातार भारत की रेटिंग में गिरावट दर्ज की गई है। 2010 की सूची में भारत 87वें स्थान पर था जबकि 2011में उसे 95वां स्थान मिला था।
कैसे हुआ रैकिंग का निर्धारण
संगठन ने इस वर्ष अपने सर्वेक्षण के तरीके में बदलाव किया है। इस बार की सूची सबसे भ्रष्ट को शून्य से सबसे बेहतर को 100 अंक के पैमाने के आधार पर तय तैयार की गई है। इस पैमाने पर भारत को 100 में से 36 अंक मिले हैं जो कि 10 अध्ययनों के औसत का परिणाम है जिसमें विश्व बैंक के देश प्रदर्शन एवं संस्थागत मूल्यांकन तथा ग्लोबल इनसाइट कंट्री रिस्क रेटिंग्स शामिल है।