भारत की मंगल ग्रह पर खोज की कोशिश में कमी आएगी, क्योंकि पहले से तय 25 किलोग्राम की बजाय अब इस मिशन के तहत स्पेस क्राफ्ट करीब 15 किलोग्राम के प्रायोगिक पेलोड के साथ उड़ान भरेगा।
मंगल ग्रह की परिक्रमा से जुड़े इस मिशन के इस साल अक्तूबर के मध्य में शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए भेजा जाने वाला स्पेस क्राफ्ट अपने साथ 14.49 किलोग्राम वजन के पांच प्रयोगात्मक पेलोड ले जाएगा। इसमें से एक मीथेन सेंसर का वजन 3.59 किलो होगा और यह सिर्फ छह मिनट में पूरे मंगल ग्रह को स्कैन करने में सक्षम होगा।
इस बात का खुलासा रविवार को कोलकाता में 100 वें इंडियन साइंस कांग्रेस के दौरान हुआ। दुनिया भर में पूर्व के मंगल मिशन के जरिए मंगल ग्रह के वातावरण में मीथेन का पता चला था, लेकिन अभी इसकी ठोस रूप में पुष्टि नहीं हो पाई है।
भारत इस मिशन के शुरू होते ही अमेरिका, रूस, यूरोप, चीन और जापान के उस क्लब में शामिल हो जाएगा। ये सभी पहले से मंगल मिशन चला रहे हैं। जानकारी के अनुसार स्पेस क्राफ्ट पर चार किलो का थर्मल इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर, 1.4 किलो का कलर कैमरा, 1.5 किलो का ल्यूमन-अल्फा फोटोमीटर और चार किलो का एक्सोफेरिक न्यूट्रल कंपोजिशन एनालाइजर होगा। इन सभी का कुल वजन 14.49 किलो होगा।
स्पेस क्राफ्ट मंगल ग्रह का तीन महीने में एक चक्कर लगाएगा। इस दौरान यह मंगल ग्रह के सबसे कम 371 किमी. और सबसे दूर 80,000 किमी. की दूरी से गुजरेगा। गौरतलब है कि मंगल मिशन की घोषणा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर की थी।