राष्ट्रीय वन्य जीव सप्ताह के बीच एक चौंकाने वाली खबर है। साल के पहले नौ महीनों में देश में 69 टाइगर और 39 गेंडों की मौत हो चुकी है। मारे गए 69 बाघों में से 41 शिकारियों के शिकार बने। महाराष्ट्र और उत्तराखंड में सबसे अधिक 12 बाघों के मारे जाने की सूचना है।
राष्ट्रीय वन्यजीव अपराध ब्यूरो इस बात से चिंतित है कि बाघों का अवैध शिकार उत्तर से दक्षिण में कर्नाटक और तमिलनाडु में फैल गया है। मालूम हो कि देश में महज 1411 बाघ शेष रह जाने के चिंतित कर देने वाले आंकड़ों से उबरते हुए 2010 में की गई गणना में बाघों की संख्या 1706 पाई गई थी। लेकिन अब एक बार फिर से इन पर खतरा मंडराने लगा है।
विश्व में एक सींग वाले गेंडे के लिए मशहूर काजीरंगा नेशनल पार्क में में 39 गेंडों की मौत हो चुकी है। इन गेंडों को सबसे ज्यादा खतरा शिकारियों से है, जो सींग के लिए हाल ही में कई गेंडों को मौत के घाट उतार चुके हैं। गेंडे के सींग के लिए शिकारियों को बाजार में 40 लाख से 90 लाख रुपये तक मिल जाते हैं।
इसके अलावा हर वर्ष आने वाली बाढ़ भी इन जानवरों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। असम सरकार के वन मंत्री रकीबुल हुसैन ने भी स्वीकार किया कि अब तक 11 गेंडों को शिकारियों ने मार डाला जबकि 28 बाढ़ के पानी में डूब गए।