उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (यूपीएसआईडीसी) में करीब दो सौ करोड़ रुपए का मेंटिनेंस घपला प्रकाश में आया है। यह घोटाला राज्यपाल के निर्देश पर हुई जांच में पकड़ा गया है। कैग ने भी अपनी ऑडिट रिपोर्ट में इस पर आपत्ति उठाई थी।
यूपीएसआईडीसी के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में 2008-11 तक करीब तीन सौ करोड़ के मरम्मत कार्य किए गए। इसमें सड़क, सीवर लाइन, वॉटर सप्लाई लाइन, नाली की मरम्मत के अलावा हैवी लोड वाली सड़कों में एमपीएम (मॉडीफाइड पेनिट्रेशन मैकेडम) डालने का कार्य प्रमुख था। इन कार्यों से संबंधित बांड और भुगतान पूर्व मुख्य अभियंता अरुण मिश्रा द्वारा किए गए थे। कैग ने अपने ऑडिट में ठेके देने के तरीकों व अन्य बिंदुओं पर आपत्ति जताई थी। इन कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली की शिकायत राज्यपाल से भी की गई।
सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल के निर्देश पर प्रबंध निदेशक ने फैजाबाद और उतेलवा औद्योगिक क्षेत्रों में बाहरी कंसलटेंट और टेक्निकल एक्पर्ट से मेंटिनेंस व एमपीएम की जांच की तो घोटाले की पोल खुल गई। पता चला कि बांदा, अतर्रा, देवरिया, फतेहपुर समेत कई जिलों में मरम्मत कार्य में मोटे पैसे का खर्च दिखाया गया, जबकि इन क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना तक नहीं हुई। प्रदेश में करीब 70 करोड़ रुपए के एमपीएम कार्य कागजों में पूरे दिखा दिए गए।
सूत्रों के मुताबिक करीब तीन सौ करोड़ के इन कार्यों में दो सौ करोड़ का घपला है। राज्यपाल को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में पूरी कहानी स्पष्ट की गई है। प्रबंध निदेशक मनोज सिंह ने कहा कि जांच की जा रही है। जल्द ही रिपोर्ट राज्यपाल को भेजी जाएगी। उन्होंने घपले की राशि पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।