प्रवासी भारतीय विद्यार्थियों में भारत में पढ़ने की दिलचस्पी घट रही है। हालत यह है कि वर्ष 2014-15 में छात्रवृत्ति योजना के तहत 100 छात्रवृत्तियों के लिए महज 190 प्रवासी विद्यार्थियों ने दिलचस्पी दिखाई। विदेश मामलों की संसदीय समिति का मानना है कि प्रवासी बच्चों की घटती रुचि का सबसे बड़ा कारण देश के संस्थानों की साख में कमी, मान्यता और सीमित पाठ्यक्रम है।
समिति इस मद में बजट आवंटन की राशि से भी संतुष्ट नहीं है। हालांकि विदेश मंत्रालय का कहना है कि प्रवासी बच्चों की घटती रुचि का कारण दी जाने वाली छात्रवृति की राशि और संस्थानों की फीस में भारी अंतर है। मंत्रालय ने संसदीय समिति को बताया है कि सरकार ने वर्तमान में प्रवासी बच्चों को 4000 डॉलर बतौर छात्रवृत्ति मिलती है जबकि देश में एनआईटी की फीस 8500 डॉलर है।
विदेश मंत्रालय ने विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में प्रवेश केलिए अलग-अलग शर्तों को भी घटती रुचि का कारण बताया है। बहरहाल प्रवासी बच्चों को लुभाने के लिए विदेश मंत्रालय अब छात्रवृत्तियों की संख्या 100 से बढ़ा कर 200 करने और इसकी राशि को 4000 डॉलर से बढ़ा कर 5000 डॉलर करने का मन बनाया है।